नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में देश के रेलवे कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने का फैसला दिया गया है। इसके तहत इस साल भी रेल कर्मचारियों को 78 दिन का वेतन बोनस के रूप में मिलेगा। इससे 11 लाख कर्मचारियों एवं उनके परिवार लाभान्वित होंगे। इस पर 2,024 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस बात की जानकारी दी। इसके अलावा कैबिनेट ने पूरे देश में ई-सिगरेट पर बैन का निर्णय किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात की जानकारी दी।








मोदी सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों को बोनस देने का यह अहम फैसला किया है। इससे बाजार में डिमांड बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसका लाभ सिर्फ नॉन गैजेटेड कर्मचारियों को मिलेगा। पिछले वर्ष प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस के रूप में अधिकतम 17,951 रुपया की राशि मिली थी।

रेलवे में प्रोडक्टिविटी को लेकर बोनस देने की शुरुआत 1979 में की गयी थी। पहले कर्मचारियों को 72 दिन के वेतन के बराबर बोनस मिलता था।




बोनस से रेलकर्मियों में खुशी की लहर
ग्रुप डी कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये हैं। सीलिंग 18 हजार रुपये पर होनी चाहिए थी। फिलहाल, त्योहार से पहले बोनस मिलने से खुशी है। आरपी राव, मंडल सचिवएससी/एसटी संघ। आशा थी कि कर्मचारियों को करीब 23 हजार रुपये बोनस मिलेगा। लेकिन, पुरानी सीलिंग से ही बोनस मिला है। एमके मेहरोत्रा, सहायक मंडल मंत्री, यूआरएमयू। कर्मचारियों की कमी के बाद भी रेल मुनाफे में है। इसके बाद भी सिर्फ 78 दिन का बोनस मिला है। सीलिंग तक नहीं बढ़ी है। कर्मचारियों ने इससे काफी निराशा है। आरके वर्मा, मंडल मंत्री, एनईआरएमयू। बोनस से कोई खुशी नहीं है। रेल मंत्रालय से 79 दिन का बोनस देने की मांग की थी, वित्त मंत्रालय ने 78 दिन का बोनस दिया है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है। आरके पांडेय, मंडल मंत्री, नरमू।




रेलवे से मिलने वाले पीएलबी (उत्पादकता आधारित बोनस) की सीलिंग लिमिट है। सीलिंग में सबसे कम वेतन पाने वाले कर्मचारी के मूल वेतन के आधार पर बोनस दिया जाता है। वर्तमान में ग्रुप डी में सबसे कम वेतन पाने वाले कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार है। लेकिन, रेलवे में अभी पुराने ऐसे कई कर्मचारी हैं, जिनका मूल वेतन सात हजार है। इसके चलते सीलिंग की लिमिट अभी भी 7000 बनी हुई है। अगर, यह सीलिंग 18 हजार रुपये के मूल वेतन से होती तो रेलवे को 2016 से एरियर भी देना पड़ता। साथ ही कर्मचारियों को ज्यादा बोनस मिलता