कर्मियों को बोनस के लिए करना पड़ सकता है इन्तजार

कोल सेक्टर में 24 व 23 से 27 सितंबर को एफडीआइ के खिलाफ आहूत हड़ताल को लेकर दिल्ली में चीफ लेबर कमिश्नर ने सोमवार को बैठक रखी थी। लेकिन बैठक में कोई भी श्रम संगठन शामिल नहीं हुआ। हड़ताल की घोषणा बीएमएस, इंटक, सीटू, एचएमएस व एटक ने की है।

बीएमएस ने 23 से 27 सिंतबर को हड़ताल की घोषणा की है। हड़ताल को लेकर कोयला क्षेत्र में पूरी तैयारी शुरू हो गई है। वहीं हड़ताल से कोल इंडिया पर बुरा असर पड़ेगा।








मौजूदा समय में कई कोयला कंपनियों अपने लक्ष्य से पीछे चल रही है। ऐसे में अगर हड़ताल पूर्ण रूप से हो जाएगी तो इसका काफी असर पड़ेगा। कोयला उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित होने से पावर प्लांटों पर भी असर पड़ेगा।

केंद्र सरकार की खनन क्षेत्रों में सौ फीसद एफडीआइ की घोषणा के बाद कोयला सेक्टर में बवाल मचा हुआ है। श्रम संगठन कोयला सेक्टर में हड़ताल की घोषणा कर चुके हैं। इंटक, एचएमएस, सीटू व एटक ने जहां 24 सिंतबर को एक दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। वहीं बीएमएस से संबद्ध अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ ने 23 से 27 सिंतबर तक पांच दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। ऐसे में प्रबंधन द्वारा बोनस को लेकर बैठक बुलाने से इस बात का संशय बना हुआ है। 14 सितंबर को बैठक नहीं हो पाई थी।




प्रबंधन पहले कोयला क्षेत्र में हड़ताल टालने को लेकर लगातार श्रम संगठनों के संपर्क में है। वहीं श्रम संगठन भी अपनी घोषणा के तहत एफडीआइ पहले वापस लें सरकार, तब होगी कोई बात पर अडिग है। अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के महासचिव सुरेंद्र घुरडे ने कहा है कि प्रबंधन हड़ताल को लेकर मोलभाव करेंगे। ऐसे में बोनस की बात करना उचित नहीं होगा। वैसे प्रबंधन 21 सितंबर को फिर से बैठक बुलाने की तैयारी में है। 2018 में 60500 रुपये बोनस मिला था। वहीं श्रम संगठन के लोगों का कहना है कि इस बार वर्ष 2018 से अधिक बोनस मिलेगा, क्योंकि कोल इंडिया का मुनाफा बढ़ा है।




केंद्र सरकार कोल सेक्टर में एफडीआइ का निर्णय वापस ले तभी कोई बात होगी। अन्यथा पांच दिवसीय हड़ताल की जो घोषणा की गई है, वह हो कर रहेगी। यह बात भारतीय मजदूर संघ के वरीय नेता व कोल व नन कोल प्रभारी डॉ. बंसत कुमार राय ने रविवार को दैनिक जागरण से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि एफडीआइ से कोल सेक्टर का क्या हाल होने वाला है, यह अभी समझ में लोगों को नहीं आ रही है। एक-दो साल में इसका असर कोल सेक्टर ही नहीं आम जनमानस पर भी पड़ेगा। कोल सेक्टर से कई लोग सीधे रूप से जुड़े हैं। राय ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ हड़ताल के साथ-साथ पूरी तरह से जनमत संग्रह कराना चाहता है कि इसका कितना व्यापक असर पड़ने वाला है।

एतिहासिक होगी 23 से 27 की हड़ताल : कोल सेक्टर में भारतीय मजदूर संघ ने 23 से 27 सितंबर तक हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।

रेलवे में शुरू हो गया प्राइवेट रेल का चलन : डॉ. राय ने कहा कि रेलवे में निजीकरण की शुरुआत हो गई है। तेजस ट्रेन पूरी तरह से प्राइवेट है। धीरे-धीरे अन्य ट्रेनों को भी प्राइवेट कर दिया जाएगा।

सेल पर भी खतरा : उन्होंने कहा कि सेल पर भी निजीकरण का खतरा है। दुर्गापुर, सेलम, भद्रावती प्लांट को बेचने की तैयारी है। विरोध के बाद सरकार ने फिलहाल रोक लगाया है।

’>>हड़ताल के बाद बोनस को लेकर हो सकती है बैठक

’>>तीन लाख कोल कर्मियों को पिछली बार मिला था 60500 रुपये बोनस

हड़ताल करना है, श्रमायुक्त के पास बैठक में शामिल होने से कोई लाभ नहीं होने वाला। हड़ताल को लेकर तैयारी जोरशोर से चल रही है।

नाथू लाल पांडेय, एचएमएस

बैठक में नहीं जाना का निर्णय सभी ने मिलकर लिया है। मजदूर हक में सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ हड़ताल करना है। तैयार पूरी है, मजदूरों में आक्रोश है।

रमेंद्र कुमार, एटक