बहुत जल्‍द ही यात्रियों को ट्रेनों के भीतर वाई-फाई की सुविधा मिल सकेगी। रेलवे इसके लिए तैयारी में जुटा है। इसके लिए रेलवे अपना खुद का स्पेक्ट्रम हासिल करेगा। ये सुविधा व्यस्त नौकरी पेशा लोगों के लिए वरदान साबित होगी। वे सफर के दौरान कार्यों को ट्रेन के अंदर से ही निपटा सकेंगे।








अभी तक रेलवे ने 1603 स्टेशनों को वाई-फाई से लैस किया है, जबकि 4882 स्टेशनों पर काम चल रहा है। वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेन के भीतर सार्वजनिक उद्घोषणा के लिए लगाए गए टीवी मानीटर्स पर आगामी और मौजूदा स्टेशनों के बारे में लाइव सूचनाएं भी प्रसारित नहीं हो पा रही हैं। ट्रेन के भीतर वाई-फाई सुविधा मिलने से ये संभव हो जाएगा। रेलवे इसके लिए अपना खुद का स्पेक्ट्रम लेने का प्रयास कर रहा है।




सरकार से स्पेक्ट्रम प्राप्त होते ही रेलवे जगह-जगह पर मोबाइल टॉवर स्थापित करेगा और ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के साथ जोड़ेगा। अभी स्टेशनों पर वाई-फाई के लिए निजी कंपनियों के स्पेक्ट्रम और सेट-अप का उपयोग किया जाता है। नौकरी पेशा लोगों के बहुत से काम हो जाएंगे आसान स्टेशनों के बीच और ट्रैक के साथ-साथ मजबूत वाई-फाई तरंगों की उपलब्धता होने से ट्रेन के भीतर इंटरनेट सर्फिंग आसान हो जाएगी और बार-बार बफरिंग की समस्या से निजात मिलेगी।




इस सुविधा से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रेन हादसों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। कोच के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फुटेज की कंट्रोल रूम से रियल टाइम निगरानी होने से अवांछित तत्वों को नियंत्रण में लेना आसान हो जाएगा।

वाई-फाई का उपयोग करते हुए भविष्य में ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम के जरिए ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। अभी जीपीएस आधारित इस यूरोपीय प्रणाली को महज इसीलिए नहीं अपनाया जा पा रहा है, क्योंकि ट्रैक के साथ वाई-फाई सुविधा नहीं होने से तरंगें बाधित हो जाती हैं।