कोटा. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर की टीम ने मंगलवार को कोटा डीआरएम चैंबर के बगल में ही दो बड़े इंजीनियरों को 1.99 लाख की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह रकम एक ठेकेदार से बिल पास करने की एवज में ली गई। कार्रवाई से पहले भी ठेकेदार दोनों को 12 लाख रुपए का कमीशन दे चुका था। नोटों की गिनती के लिए बैंक से आई मशीन…

दोनों भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सर्विसेज के अधिकारी हैं और दोनों के पास बड़े सेक्शन का काम है जहां करोड़ों के काम होते हैं। शाम करीब साढ़े 4 बजे जयपुर एसीबी के एएसपी नरोत्तम वर्मा की अगुवाई में 14 लोगों की टीम ने कार्रवाई की। दोनों के घरों की तलाशी से एसीबी को 51.24 लाख रुपए नकद व करोड़ों रुपए के प्रोपर्टी इनवेस्टमेंट के दस्तावेज मिले। नोटों की गिनती के लिए बैंक से मशीन मंगानी पड़ी, रात तक गिनती चल रही थी। दोनों अफसरों के चैंबर डीआरएम के बगल में हैं और वहीं बैठकर इन्होंने घूस ली।








इसलिए मांगते थे कमीशन
एएसपी वर्मा ने बताया कि करीब 20 दिन पहले ठेकेदार ने ब्यूरो को दी शिकायत में कहा था कि उसके बिल पास करने की एवज में वरिष्ठ मंडल अभियंता (उत्तर) मानवेंद्र सिंह और मंडल अभियंता (पूर्व) सुरेश सिंह 2 फीसदी कमीशन मांग रहे हैं। कमीशन देने के बावजूद समय पर बिल पास नहीं किए जाते और परेशान किया जाता है। 15 दिन पहले एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करवाया, तब भी दोनों इंजीनियरों ने उससे 1-1 लाख रुपए की घूस ली।




घूसखोरी का ऐसे बनाया प्लान
बड़े दफ्तर में बैठकर घूसखोरी कर रहे अफसरों का मामला था, ऐसे में एसीबी ने करीब 15 दिन तक तसल्ली से पूरा प्लान तैयार किया और फिर मंगलवार को कार्रवाई को अंजाम दिया। मानवेंद्र को 1 लाख 7 हजार व सुरेश सिंह को 92 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मानवेंद्र ने यह रकम सूटकेस में तथा सुरेश ने अपनी दराज में रख दी। यहां कोटा, जयपुर व भोपाल में 8 प्लॉटों के कागजात, 3 बैंक पास बुक, लॉकर, ज्वैलरी मिली।

डीआरएम चैंबर
एएसपी वर्मा ने बताया कि कोटा मंडल में ठेकेदार के करीब 10 करोड़ के काम चल रहे हैं। वर्तमान में मानवेंद्र के पास 53 लाख व सुरेश के पास 96 लाख रुपए के बिल परिवादी ठेकेदार के पेंडिंग हैं। इन्हीं की एवज में उक्त रकम ली गई। सत्यापन के दौरान हुई वार्ता में दोनों ने साफ कहा- बिल पास कराने हैं तो 2 प्रतिशत कमीशन देना ही पड़ेगा। सत्यापन के वक्त भी दोनों ने एक-एक लाख रुपए लिए। जबकि मानवेंद्र को 8.50 लाख और सुरेश को 1.50 लाख रुपए पुराने बिलों के कमीशन के पेटे ठेकेदार एसीबी को शिकायत करने से पहले ही दे चुका था।




नोट गिनने में लगे 6 घंटे
देर रात तक दोनों इंजीनियरों के साथ एसीबी की अलग-अलग टीमें ऑफिस में ही दस्तावेज जब्त करने समेत अन्य कार्रवाई में लगी थी, जबकि दो अन्य टीमें इनके घरों की सर्च कर रही थी। मानवेंद्र के रेलवे कॉलोनी स्थित सरकारी बंगले पर एएसपी अरुण माच्या की अगुवाई में टीम ने सर्च की, जहां 3.64 लाख रुपए, सरकारी डॉक्टर पत्नी की ज्वैलरी, दिल्ली और नोएडा जैसी जगहों पर आठ प्लॉटों के कागजात, छह बैंक खातों की पासबुक, लॉकर के दस्तावेज मिले हैं। वहीं स्टेशन जैन मंदिर के पास स्थित मल्टीस्टोरी में रहने वाले डिवीजनल इंजीनियर सुरेश सिंह के घर डीएसपी तरुणकांत सोमाणी की टीम ने तलाशी ली, जहां से एक सूटकेस और आलमारी में 47.60 लाख रुपए मिले। देर रात तक बैंक से मशीन मंगवाकर नोटों की गिनती चल रही थी।

इस ऑफिस में बैठता है आरोपी।

घर में कार्रवाई करती एसीबी की टीम।

railway engineer arrested for bribe

 

लिफाफे वालों को पर्ची देने की जरूरत नहीं
आरोपी अक्सर ऑफिस टाइम खत्म होने से घंटे-डेढ़ घंटे पहले अपने चैंबर में ही बुलाकर रकम लेते रहे हैं। आम लोगों को दोनों इंजीनियरों से मिलने से पहले सहायक कर्मचारी को पर्ची देनी पड़ती है, लेकिन ठेकेदार सीधा अंदर गया और दोनों को लिफाफे थमाकर आ गया। उसका इशारा पाकर टीम दोनों के चैंबर में पहुंच गई। जैसे ही टीम ने अपना परिचय दिया और लिए गए पैसों के बारे में पूछा तो दोनों का एक ही जवाब था-”हमें पता नहीं, कोई आया और जबरदस्ती यहां रखकर चला गया।’