चलती ट्रेनों में सुबह छह से रात 10 बजे के बीच यात्रियों के सिर और पैर जैसे अंगों की मालिश इस सेवा के बदले यात्रियों से 100 रुपये, 200 रुपये और 300 रुपये शुल्क का प्रावधान प्रस्तावित मालिश सेवा के लिए एक निजी एजेंसी से करार किया गया था इस सेवा से रेलवे के खजाने में सालाना 20 लाख रुपये जमा होने की उम्मीद थी

पश्चिम रेलवे ने शनिवार को कहा कि उसने इंदौर से चलने वाली 39 ट्रेनों में यात्रियों को पैर और सिर की मालिश की सुविधा मुहैया कराने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। पश्चिम रेलवे का मुख्यालय मुंबई है। इंदौर पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के तहत आता है।पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रवक्ता रविन्द्र भाकर ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘इंदौर स्टेशन से चलने वाली ट्रेनों में सिर और पैर की मालिश सेवाओं को पेश करने का प्रस्ताव पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल द्वारा दिया गया था।’ बयान में कहा गया है कि जैसे ही यह प्रस्ताव पश्चिम रेलवे के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, इसे वापस लेने का फैसला किया गया।








इंदौर के नवनिर्वाचित सांसद शंकर लालवानी और निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। लालवानी ने इस मुद्दे पर रेलवे मंत्रालय को एक पत्र लिख कर कहा था कि यात्रियों को, खासकर महिलाओं की उपस्थिति में मालिश की सुविधा प्रदान करना उचित नहीं होगा। लालवानी के पत्र के बाद रतलाम रेलवे मंडल के प्रबंधक आरएन सुनकर ने स्पष्ट किया था कि इस सेवा के तहत ‘‘पूरे शरीर की मालिश’ नहीं होगी, बल्कि केवल सिर और पैरों की मालिश होगी।




रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह प्रस्ताव किराया के अलावा अन्य क्षेत्रों से राजस्व जुटाने के लिए पहल का हिस्सा था।लालवानी के बाद निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी सवाल उठाए थे। महाजन ने इस सिलसिले में रेल मंत्री पीयूष गोयल को शुक्रवार को पत्र लिखा था।




पत्र में महाजन ने गोयल से जानना चाहा था कि क्या पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल की प्रस्तावित मालिश योजना को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दी है? महाजन ने पत्र में पूछा था कि इस प्रकार की (मालिश) सुविधा के लिए चलती रेलगाड़ी में किस तरह की व्यवस्था की जाएगी, क्योंकि इससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा एवं सहजता के संबंध में कुछ प्रश्न हो सकते हैं।