ट्रेन में यदि किसी वजह से यात्री की सेहत खराब होती है, तो रेलवे की तरफ से यात्री के स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए सेहत सुविधा मुहैया करवाई जा सकती। इसके लिए 182 टोल फ्री नंबर डायल कर सकते हैं या फिर ट्रेन के अटेंडेंट या टीटीई से संपर्क कर सकते हैं। इनके पास डाॅक्टरों के नंबर होते हैं।








किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति में टीटीई की तरफ से यह भी देखा जाता है कि ट्रेन में कहीं डॉक्टर तो नहीं सफर कर रहा है। अगर चार्ट में पता चले कि कोई डाॅक्टर है, तो तुरंत उनसे संपर्क करके चलती ट्रेन में ही सेहत सुविधा मुहैया करवाई जाएंगी। अन्यथा अगले स्टेशन पर सूचना देकर डॉक्टर को कॉल करके ट्रेन पहुंचने से पहले ही बुलवा लिया जाएगा।




ट्रेन रुकते ही डॉक्टर कोच में पहुंचेगा : चलती ट्रेन में यात्री की तबीयत बिगड़ने की सूरत में डॉक्टर बुलाने के लिए 100 रुपए देकर सुविधा का लाभ ले सकते हैं। पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु की तरफ से ट्रेन में सफर के दौरान यात्री की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिलाने के उद्देश्य 20 रुपए में डॉक्टरी सेवा लेने की सुविधा शुरू की थी। यात्री फोन व ट्विटर के जरिए मैसेज देकर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। ऐसे में कॉल आने पर रेलवे अस्पताल के डॉक्टर ओपीडी छोड़कर ट्रेन पहुंचने से पहले ही स्टेशन पर मरीज का इंतजार करने के लिए खड़े हो जाते थे।




लेकिन छोटी सी परेशानी होने पर तुरंत कॉल पर कॉल करने की बढ़ती शिकायतों के चलते ही रेलवे की तरफ से हाल ही में इस सुविधा की राशि 20 से बढ़ाकर 100 रुपए कर दी गई है। ट्रेन में किसी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर बीमा का क्लेम करने के लिए नाॅमिनी को रेलवे अथॉरिटी द्वारा ट्रेन की दुर्घटना की पुष्टि वाली रिपोर्ट सबमिट करवानी होती है।