रेलवे की सभी कोच फैक्ट्री अब अलग-अगल श्रेणी के कोच का उत्पादन करने की बजाए सीधे नई यात्री ट्रेनें बनाएंगी। रेल मंत्रालय ने बड़ा बदलाव करते हुए सभी फैक्ट्री के लिए विभिन्न श्रेणियों के कोच के साथ ही पेंट्रीकार,पावर जनरेशन कार, एसएलआर कोच बनाना भी अनिवार्य कर दिया है। इससे देशभर में पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर नई राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें दौड़ सकेंगी।








सभी 17 जोनल रेलवे निर्धारित समय में नई ट्रेनों को पटरियों पर दौड़ा सकेंगे। रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए फैसले से मॉर्डन कोच फैक्ट्री (एमसीएफ), रायबरेली; इंटीग्रेरटेड कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चैन्नई और रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ), कपूरथला उत्पादन इकाइयों की जवाबदेही तय हो जाएगी। इससे कम समय में नई ट्रेनें पटरियों पर दौड़ने लगेंगी। वर्तमान में सभी कोच फैक्ट्री एसी-1, एसी-2, एसी-3, चेयरकार, एग्जिक्यूटिव कार व स्लीपर श्रेणी के कोच का उत्पादन करते हैं।




लेकिन पेंट्रीकार, पावर जनरेशन कार, एसएलआर (गार्ड, विकालांग व महिला कोच) आदि का उत्पादन सभी इकाइयों में नहीं होता है। उन्होंने बताया कि उक्त कोच का उत्पादन टेक्निकल रूप से मुश्किल होता है। इनके उत्पादन में अधिक समय लगता है। इसका असर यह पड़ता है कि सभी श्रेणियों के कोच वित्तीय वर्ष में तय किए गए लक्ष्य के अनुसार बना लिए जाते थे। लेकिन पेंट्रीकार, पावर कार व एसएलआर के कोच का उत्पादन नहीं होने के कारण नई ट्रेनें बनाकर भी नहीं चल पाती थीं। इससे विभिन्न जोनल रेलवे में नए कोच यार्ड में खड़े रहते थे।




नई ट्रेनें नए नंबर के साथ बनाई जाएंगी। इससे जोनल रेलवे को पता रहेगा कि उनकी कौन सी ट्रेन है और कब तक मिलेगी। नई ट्रेनों में सभी श्रेणियों के कोच जैसे एसी-1,2, 3, स्लीपर, जनरल श्रेणी, चेयरकार, एग्जिक्यूटिव श्रेणी के कोच लगे होंगे।