इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन बहाली व पेंशन कांड नियामक विकास प्राधिकरण अधिनियम 2013 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र के अटार्नी जनरल को नोटिस जारी किया है। साथ ही केंद्र व राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।








यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस सिद्वार्थ वर्मा की खंडपीठ ने राजकीय मुद्रणालय कर्मचारी संघ की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तीन जुलाई तक जवाब दाखिल कर दिया जाय। कर्मचारियों ने उनकी मर्जी के बगैर नई पेंशन स्कीम जबरन थोपने का आरोप लगाते हुए इसके के विरोध में प्रदेशव्यापी हड़ताल की। इस कारण हाईकोर्ट की काजलिस्ट न छपने से न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। कोर्ट ने हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का आदेश दिया व जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।








पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राज्य कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। इसकी वजह से राजकीय मुद्रणालय में हाईकोर्ट की कॉज लिस्ट नहीं छप सकी और न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान पैदा हुआ। इस मामले पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जनहित याचिका कायम कर ली। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि अगर नई पेंशन योजना इतनी अच्छी है तो सांसदों और विधायकों पर क्यों नहीं लागू की जा रही है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को तीन जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।