रेल मंत्री से लेकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन तक मृतक आश्रितों को नौकरी देने के लिए लाल फीताशाही को खत्म करने के लिए वर्षों से आदेश पर आदेश दे रहे हैं। इसके बावजूद कई मंडलों के कार्मिक विभाग के अधिकारी अपनी मर्जी चला रहे हैं। इसमें उत्तर रेलवे सबसे आगे है, लेकिन डीआरएम संजय त्रिपाठी की एक चेतावनी से ही सीनियर डीपीओ और उनकी टीम की नींद खुल गई। गैंगमैन सोनू कुमार के मामले में 10 घंटे में रिपोर्ट दे दी। सोनू की पत्नी को 24 घंटे में ही नियुक्ति पत्र दिलवाकर डीआरएम ने संदेश दे दिया कि अब मंडल में मृतक आश्रितों की नियुक्ति में खेल नहीं चलेगा।







उत्तर रेलवे में कई मृतक आश्रितों को कई-कई महीने चक्कर काटने के बावजूद नौकरी नहीं मिल रही है। आश्रित इंस्पेक्टरों से लेकर कार्मिक विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाते रहते हैं, लेकिन उन पर असर नहीं होता है। कई मृतक आश्रित अवैध वसूली का भी आरोप लगा चुके हैं। कई बार यूनियनों को भी स्थायी वार्ता तंत्र की बैठक में मृतक आश्रितों की भर्ती के मामले उठाने पड़ते हैं। लेकिन, डीआरएम की इस पहल से स्पष्ट हो गया है कि अगर अधिकारी चाहें तो महीनों नहीं बल्कि दो दिनों में ही ऐसे मामलों में नौकरी दी जा सकती है।




उत्तर रेलवे के डीआरएम संजय त्रिपाठी ने गुरुवार दोपहर हरौनी और पिपरसंड स्टेशन के बीच पेट्रोलिंग के दौरान ट्रेन की चपेट में आने के बाद जान गंवाने वाले ट्रैकमैन की जगह उसकी पत्नी को 24 घटे में नौकरी दे दी है। इतना ही नहीं उसके सारे भुगतान भी दूसरे दिन ही बैंक खातों में ट्रांसफर करवा दिए गए। रेलवे के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी रेलकर्मी की मौत पर इतने कम समय में मृतक आश्रित को अनुकम्पा के आधार पर नौकरी दी गई है।

बंथरा के रामदासपुर गांव निवासी गैंगमैन सोनू कुमार (33) गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे लखनऊ-कानपुर रेल खंड के हरौनी और पिपरसंड रेलवे स्टेशन के मध्य हॉट वेदर पेट्रोलिंग कर रहा था। सहिजनपुर क्रॉसिंग के पास अचानक ट्रेन की चपेट में आने उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे पहले उसके पिता राजाराम की मौत हो गई थी।




उनकी जगह मृतक गैंगमैन की मौत के 24 घंटे में मिली पत्नी को नौकरी
आश्रित के रूप में उसे नौकरी मिली थी। उसके परिवार में उसकी पत्नी सिमरन के अलावा तीन बेटियां बरखा, रिमझिम और बेबी  हैं। सीनियर डीसीएम जगतोष शुक्ल ने बताया कि घटना की जानकारी होने पर डीआरएम संजय त्रिपाठी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेट्रोलिंग के दौरान कर्मचारियों के साथ ऐसे हादसे रोकने के हर संभव प्रयास किए जाएं।
कर्मचारियों ने दी बधाई
महीनों दौड़ाने वाले निरीक्षकों ने 10 घंटे में दी रिपोर्ट
गुरुवार को पेट्रोलिंग के दौरान जान गंवाने वाला सोनू न तो किसी किसी नेता का रिश्तेदार था और न ही उसकी किसी अधिकारी तक पहुंच थी। देखना यह है कि अब मृतक आश्रितों के पुराने मामलों में कार्मिक विभाग कितनी तत्परता दिखाता है। यूआरएमयू ने मंडल मंत्री आरवी सिन्हा व एमके मल्होत्रा ने इस मामले में डीआरएम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मंडल में यह पहला मौका है, जब मृतक आश्रित को नौकरी देने में ऐसी त्वरित कार्रवाई की गई है।