पीएफआरडीए ने एनपीएस में निवेश के नियमों में बदलाव किया है। पेंशन स्कीम के प्रदर्शन में सुधार के लिए पेंशन फंड्स में लचीलापन लाने को लेकर सरकारी प्रतिभूतियों तथा शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा में पांच-पांच फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।









हाइलाइट्स

  • पीएफआरडीए ने नैशनल पेंशन स्कीम की निवेश गाइडलाइंस में किया बदलाव
  • बदलाव के अनुसार ये स्कीमें अब डेट इंस्ट्रूमेंट्स में कर सकेंगी ज्यादा निवेश
  • निवेश गाइडलाइंस में बदलाव स्कीम को और लचीला बनाने के लिए किया गया
  • सरकारी प्रतिभूतियों तथा शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश सीमा में 5-5 % की बढ़ोतरी




नैशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में निवेश करने वाले निवेशकों को अब पहले से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है। पेंशन फंड रेग्युलेटरी ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने कुछ एनपीएस स्कीमों के निवेश गाइडलाइंस में बदलाव किए हैं, जिससे ये स्कीमें अब डेट सिक्यॉरिटीज में पहले से अधिक निवेश कर सकेंगी। यह बदलाव स्कीम को और लचीला बनाने के लिए किया गया है, ताकि उनका प्रदर्शन बेहतर हो सके।




पीएफआरडीए द्वारा 25 मार्च, 2019 को जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, ‘पेंशन स्कीम के प्रदर्शन में सुधार के लिए पेंशन फंड्स में लचीलापन लाने को लेकर सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्यॉरिटीज) तथा शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा में पांच-पांच फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।’
सर्कुलर के मुताबिक, ये बदलाव एक अप्रैल 2019 से लागू होंगे और केवल एनपीएस-नैशनल गवर्नमेंट स्कीम (सीजी), स्टेट गवर्नमेंट स्कीम (एसजी), कॉरपोरेट सेंट्रल गवर्नमेंट (सीजी) स्कीम, लाइट स्कीम्स ऑफ एनपीएस तथा अटल पेंशन योजना के लिए ही लागू होंगे।

गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज में अब 55 फीसदी तक निवेश की मंजूरी होगी, जो पहले 50 फीसदी थी। इसी तरह, शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा 10 फीसदी होगी, जो पहले पांच फीसदी थी।

विभिन्न एसेट्स क्लास की निवेश सीमा में संशोधन

सूत्रों ने बताया कि यह बदलाव दीर्घकालिक रिटर्न में स्थिरता लाने और स्कीम के प्रदर्शन में सुधार के लिए किया गया है।