रेलवे ज्यादा कमाने की होड़ में लांग हॉल गाड़ियों को चलाने में जुटा है। बीते कई हफ्तों से इन गाड़ियों की वजह से रोजाना चार से पांच एक्सप्रेस गाड़ियां राइट टाइम होने के बाद भी घंटों लेट हो जा रही हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।








रेल मंडल से हर दिन दो से तीन लांग हॉल मालगाड़ी गुजरती हैं। इनकी गति 70 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं होती है। इसकी गति जैसे ही 30 किमी प्रति घंटा से कम होती है तो गाड़ी का प्रेशर डाउन हो जाता है।

इससे मेन ट्रैक पर या छोटे स्टेशनों पर मालगाड़ी खड़ी हो जाती है। गाड़ी को दोबारा गति देने के लिए कम से कम 40 मिनट का समय लगता है। इस दौरान लांग हॉल गाड़ी के पीछे चलने वाली ट्रेनों को रोकना पड़ता है।




30 जनवरी को डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस बरेली तक तय समय पर आयी, लेकिन लांग हॉल के चलते दो घंटे देरी से मुरादाबाद पहुंची। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल कहते है कि लांग हॉल में प्रेशर डाउन होने की समस्या होती है, जिससे कम समय में ठीक कर चला दिया जाता है।




छह ट्रेनें बीच रास्ते में: बुधवार को छह गाड़ियां रुकी रहीं। सुबह 5.54 बजे रुड़की के पास लांग हॉल मालगाड़ी का प्रेशर डाउन हो गया। रोजा के पास भी सुबह 5.55 बजे लांग हॉल मालगाड़ी का प्रेशर डाउन हो गया। इससे अमृतसर कानपुर एक्स. बालामऊ के पास रुकी रहीं। जनसाधारण एक्सप्रेस, चंडीगढ़ इंटरसिटी, कानपुर एक्सप्रेस और पांच मालगाड़ी बीच रास्ते में रुकी रहीं।