रेल मंत्रालय ने ट्रेन के एसी श्रेणी कोच में सहायकों के पद पर पूर्व सैनिकों को नियुक्ति करने का फैसला किया है। नई नीति के अनुसार पूर्व सैनिकों को पक्की नौकरी देने के बजाए ठेके पर रखा जाएगा। रेलवे का तर्क है कि पूर्व सैनिकों की तैनाती से यात्री सुरक्षा मजबूत होगी। वहीं चादर, तकिया, कंबल चोरी होने की घटनाओं पर लगाम लगेगा। .








रेलवे बोर्ड ने 18 फरवरी को एसी श्रेणी कोच में सहायकों (कोच अटेंडेंट) नियुक्ति करने का आदेश जारी किया है। इसमें उल्लेख है कि सभी 17 जोनल रेलवे कोच सहायकों के रिक्त पदों के अनुसार पूर्व सैनिकों की नियुक्ति कर सकती हैं। .

पूर्व सैनिकों को आउट सोर्सिंग (ठेके) के तहत रखा जाएगा। जोनल रेलवे नियम व शर्ते स्वयं तय करेंगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी लेने की जरुरत नहीं है। रेलवे में लगभग 3000 से 4000 हजार कोच सहायक के पद हैं। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व मध्य रेलवे ने प्रयोग के तौर पर कोच सहायकों की भर्ती करने का फैसला किया था। .




रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने इसके आधार पर सभी *जोनल रेलवे को पूर्व सैनिकों को बतौर कोच सहायकत भर्ती करने के आदेश जारी किए हैं। जोनल रेलवे पूर्व *सैनिकों को नियुक्ति के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार करेंगे। इसमें पूर्व सैनिकों को दो से तीन साल के लिए ठेके पर *रखा जाएगा।.




नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (एनएफआईआर) महामंत्री एम. राघवैया ने आउट सोर्सिंग नीति का विरोध किया है। उन्होने कहा कि सरकार रेलवे में निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दे रही है। पूर्व सैनिकों को बेडरोल की आपूर्ति के काम में लगाना उचित नहीं है। ठेकेदारी प्रथा से यात्री सुविधा का स्तर गिरता है और उनक सुरक्षा को खतरा बना रहता है। .