आरबीआई बैंकों की मनमानी को देखते हुए ग्राहकों के लिए कर्ज की दरें तय करने के लिए नई नीति लाने की तैयारी कर रहा है। इससे होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन या लघु उद्योगों के लिए कर्ज की दरों में कमी आ सकती है।

आरबीआई की तीन दिनी मौद्रिक समीक्षा के आखिरी दिन गुरुवार को केंद्रीय बैंक इस पर अंतिम  दिशानिर्देश जारी कर सकता है। कर्ज की दरों को सीमांत लागत उधारी दर (एमसीएलआर) को सीधे रेपो दर या सरकारी बांड की ब्याज दर से जोड़ा जा सकता है। इससे ब्याज दरों में ज्यादा पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों की ईएमआई कम होगी। इससे पहले बैंकों से एक अप्रैल 2016 से हर माह एमसीएलआर की गणना करने और उसे सार्वजनिक करने को कहा गया था और इससे कम दरों पर कर्ज न देने का आदेश दिया था। लेकिन इसका ठीक ढंग से पालन नहीं किया गया।








अभी आंतरिक मानकों पर तय होती है ब्याज दर

अभी बैंक कर्ज की दर तय करने के लिए आंतरिक मानकों को आधार मानते हैं। उच्चतम उधारी दर, आधार दर, एमसीएलआर, बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट जैसे मानक शामिल हैं। यह नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू की जा सकती है। इससे नए वित्तीय वर्ष में होम लोन या ऑटो लोन की ईएमआई में कमी देखने को मिल सकती है।




लोन की पूरी अवधि में समान ही रहेगी ब्याज दर

नई व्यवस्था के तहत लोन लेते समय तय ब्याज दर कर्ज की पूरी अवधि तक समान रखे जाने को कहा है। आरबीआई का मानना है कि एक बैंक किसी एक लोन की दर तय में की मानक दरों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। दरअसल, अगस्त 2018 से बाद के मौद्रिक नीति समीक्षा को छोड़ दें तो आरबीआई ने लगातार ब्याज दरों में कमी की है, लेकिन रेपो दर या रिवर्स रेपो दर में कमी का पर्याप्त लाभ बैंकों द्वारा ग्राहकों को नहीं दिया गया। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने बैंकों से नए बेंचमार्क उधारी दर की व्यवस्था अपनाने को कहा है।

ब्याज दर में कटौती के आसार

आरबीआई गुरुवार को मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। इससे भी कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है। रेपो दर यानी बैंकों द्वारा आरबीआई से उधार लेने की दर में कमी आई तो बैंक भी ग्राहकों को राहत देंगे। हालांकि महंगाई में रिकॉर्ड कमी के बावजूद तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव राहत की राह में रोड़ा बन सकती है।




बजट से भी मिली थी राहत 

पैसा बाजार के सीईओ और सह संस्थापक नवीन कुकरेजा ने कहा कि पांच लाख तक करयोग्य आय को टैक्स से छूट से घर खरीदारों में ईएमआई चुकाने की क्षमता बढ़ेगी। जो अभी तक घर खरीद से हिचकिचा रहे थे, वे भी फैसला करेंगे। जिन्होंने एक या दो साल में घर खरीदने की सोची है, वे टैक्स बचाने के साथ एसआईपी के जरिये अच्छा फंड जुटा सकते हैं। किराये पर घर की आय की कर छूट सीमा भी 1.8 लाख से बढ़ाकर 2.4 लाख करने से भी घर खरीदारों को राहत मिली है।

निर्माणाधीन घरों पर भी कर में राहत के संकेत

केंद्र सरकार ने लगातार संकेत दिए हैं कि निर्माणाधीन घरों पर भी जीएसटी 12 से घटाकर पांच फीसदी पर लाया जा सकता है। फरवरी में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में इस पर निर्णय हो सकता है। दस जनवरी को हुई बैठक में इस पर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी, क्योंकि उन्हें इससे राजस्व में नुकसान का डर है।