हड़ताल से पहले निकाली गई मोटरसाइकल रैली जवाहर भवन परिसर भी पहुंची थी, लेकिन इससे जवाहर भवन और इंदिरा भवन के दैनिक कार्य प्रभावित नहीं हुए। कार्यालय मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी, सरकारी समितियां एवं पंचायत विभाग इंदिरा भवन के प्रशासनिक अधिकारी सरसिज त्रिवेदी ने कहा कि जवाहर भवन और इंदिरा भवन में हड़ताल का कोई आह्वान नहीं है। वहीं, निदेशालय बाल विकास एवं पुष्टाहार के प्रधान सहायक अजय बाजपेई और अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के सहायक ग्रेड वन डीके मिश्रा ने भी कार्यालय में दैनिक कार्य प्रभावित न होने की बात की। संस्कृति निदेशालय में भी दैनिक कार्य रोज की तरह हुआ, हालांकि भाषा संस्थान में कर्मचारियों की संख्या कम रही।•








हड़ताल पर जा रहे कर्मचारियों पर किसी कार्रवाई से पहले सरकार उनका जोर आंकने के मूड में है। सोमवार देर रात एस्मा लगाने के बाद सरकार ने मंगलवार को सभी जिलों में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस हड़ताल का असर परीक्षा, निर्वाचन और आवश्यक सेवाओं पर बिल्कुल न पड़े। इस बीच मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव-कार्मिक ने उन सभी कर्मचारी संगठनों के साथ मीटिंग भी की है, जो हड़ताल में शामिल नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार इनका इस्तेमाल कर हड़ताल को बेअसर साबित करना चाहती है।




एस्मा लगाने के बाद भी कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच हड़ताल के फैसले पर अडिग है। ऐसे में सरकार भी हड़ताल के असर की पड़ताल करना चाहती है। सूत्र के मुताबिक, शुरुआती दिनों में हड़ताल का असर नहीं रहा तो सरकार इसे छह दिन तक चलने देगी। इसके उलट अगर हड़ताल का ज्यादा असर पड़ता है तो सरकार कर्मचारियों पर सख्ती करेगी। सूत्रों का दावा है कि सरकार चुनाव से ऐन पहले सीधे तौर पर कर्मचारियों पर सख्ती कर उनकी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती।

पूरी मशीनरी सक्रिय : सरकार ने हड़ताल का असर फीका करने के लिए पूरी मशीनरी सक्रिय कर दी है। हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों का दावा है कि हड़ताल की अवधि तक न तो निर्वाचन का काम किया जाएगा, न परीक्षाओं में कोई सहयोग किया जाएगा। वहीं, इस बारे में अपर मुख्य सचिव-कार्मिक मुकुल सिंघल ने कहा कि परीक्षाएं बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला हैं। इसे कर्मचारी भी समझते हैं। वे इसे बाधित नहीं करेंगे। गौर करने वाली बात है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं सात फरवरी से ही शुरू हो रही हैं, जबकि कर्मचारी बुधवार से हड़ताल पर जा रहे हैं।




दावे दोनों के… हकीकत पर संदेह : हड़ताल पर जाने वाले और समर्थन न करने वाले दोनों गुटों ने अपने साथ 20 लाख कर्मचारियों के होने का दावा किया है। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कितने राज्य कर्मचारी प्रदेश में हैं/ कर्मचारी संगठनों के ही मुताबिक, राज्य कर्मचारियों की कुल संख्या करीब 9 लाख है। पेंशनधारकों और शिक्षकों समेत अन्य तबकों को भी जोड़ लिया जाए तो भी यह संख्या 20 लाख तक मुश्किल से ही पहुंचती है।
फिलहाल कर्मचारियों का जोर देखेगी सरकार
सरकार का दावा: सबसे ज्यादा वेतन-भत्ते यूपी में

पुरानी पेंशन बहाली पर हड़ताल के लिए कर्मचारियों के अडिग रहने की घोषणा के बाद सरकार ने मंगलवार देर रात एक आंकड़ा जारी करते हुए प्रदेश को अपने कर्मचारियों को सबसे ज्यादा वेतन व भत्ते देने वाला राज्य बताया है। सरकार ने कहा है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी गई हैं। मकान किराया और नगर प्रतिकर भत्ता दोगुना कर दिया गया। सरकार ने दावा किया है कि एनपीएस में कर्मचारियों का हित पूरी तरह सुरक्षित है।

अफसरों को निर्देश, परीक्षा, निर्वाचन और आवश्यक सेवाओं पर न पड़े हड़ताल का असर
कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा साथ नहीं

कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने मंगलवार को मुख्य सचिव से मिलकर हड़ताल पर न जाने की बात कही। दावा है कि कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के 21 संगठनों के सदस्य हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। वहीं, मोर्चा संयोजक वीपी मिश्र ने कहा कि सरकार संशोधित आदेश के मुताबिक एनपीएस में वेतन और महंगाई भत्ते का 14% अंशदान देगी। इससे कर्मचारियों को लाभ होगा।
इन्होंने दिया समर्थन

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के संजय सिंह, शिवशंकर पाण्डेय, सुधांशु मोहन, अधिकारी महापरिषद के प्रधान महासचिव एसके सिंह, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री शिवबरन सिंह यादव, वाणिज्य कर सेवा संघ के राजवर्धन सिंह, अटेवा के मंत्री प्रदीप सिंह, इंजिनियर्स महासंघ के पूर्व अध्यक्ष विष्णु तिवारी, महासंघ के महामंत्री जीएन सिंह, सीनियर शिक्षक संघ के अध्यक्ष अवधेश मिश्रा, विशिष्ट शिक्षकों के नेता अनुज शुक्ला, राजकीय वाहन चालक महासंघ के अध्यक्ष रामफेर पाण्डेय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामराज दुबे, रामनरेश और सुरेश यादव।• टीम एनबीटी, लखनऊ

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर बुधवार से हड़ताल करने जा रहे कर्मचारियों को राज्य सरकार बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) में केन्द्र की तर्ज पर 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाएगी। इसके लिए गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई पेंशन में सरकारी अंशदान की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो जाएगी। वहीं, कर्मचारी अपनी हड़ताल की बात पर अड़े हुए हैं।

हड़ताल शुरू करने से एक दिन पहले मंगलवार को कर्मचारियों ने लोक निर्माण विभाग मुख्यालय से बाइक रैली निकाली, जो शहर के तमाम सरकारी दफ्तरों से होते हुए वापस यहीं आई। इस दौरान सभी विभागों के कर्मचारियों ने रैली का स्वागत किया और हड़ताल को समर्थन दिया। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि हक मांगने के लिए आंदोलन करना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार एस्मा लगाकर इसका दमन नहीं कर सकती।

150 से ज्यादा संगठन शामिल: मंच का दावा है कि हड़ताल में 150 से ज्यादा संगठन शामिल हैं। हड़ताल का असर 200 से ज्यादा विभागों में होगा। उप्र चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामराज दुबे ने बताया कि सोमवार रात मुख्य सचिव के साथ बीस से ज्यादा विभागों के नेताओं की वार्ता हुई थी, जो असफल हो गई। इसके बाद आंदोलन में यह स्थिति आई है।