नए वर्ष में ट्रेनों में टिकट की जांच करने वाले चल टिकट निरीक्षकों (टीटीई) की परेशानी दूर होने की उम्मीद जगी है। उनके लिए बने विश्राम गृह में सुविधाएं बढ़ेंगी और उसके रखरखाव की समीक्षा भी होगी।

रेल चालक व गार्ड की तरह टीटीई भी ट्रेन में तैनात रहते हैं, लेकिन इन्हें उनकी तरह सुविधाएं नहीं मिलती है। इन्हें रनिंग स्टाफ का दर्जा भी नहीं दिया गया है, जबकि चालक, सह चालक, गार्ड आदि को रनिंग स्टाफ का दर्जा प्राप्त है। इसके तहत इन्हें अधिक भत्ता, वातानुकूलित विश्राम गृह (रनिंग रूम) सहित कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस तरह की सुविधाओं से टीटीई वंचित हैं।








पहले इन्हें भी रनिंग स्टाफ का दर्जा मिला हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वर्ष 1931 में ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों की मदद करने का आरोप लगाते हुए इनसे यह दर्जा छीन लिया था, जिसे हासिल करने के लिए वे पिछले कई वर्षो से संघर्ष कर रहे हैं। इन्हें यह सुविधा फिर से मिल सके इसके लिए रेलवे बोर्ड ने तीन सदस्यीय समिति भी गठित की है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही इन्हें मिलने वाली सुविधाओं में बढ़ोतरी होने लगी है।




रनिंग रूम में ठहरने वाले कर्मचारियों को रसोइया की भी सुविधा मिलती है जिससे कि वह मनपसंद भोजन कर सकें। इसके साथ हीं ड्यूटी के समय उन्हें जगाने के लिए कॉल मेन तैनात होता है। साफ सफाई व रखरखाव की भी अच्छी व्यवस्था होती है। अब इसी तरह की सुविधाएं टीटीई को भी मिलेगी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है।




सभी मंडलों को प्रत्येक महीने विश्राम गृह में उपलब्ध और बढ़ाई गई सुविधाओं की रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। टीटीई इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं। नवंबर में महीने में इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गनाइजेशन (आइआरटीसीएसओ) की ओर से ताल कटोरा इनडोर स्टेडियम में आयोजित मंथन कार्यक्रम में देशभर के टीटीई जुटे थे। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सांसदों के सामने भी अपनी मांग रखी थी।

Posted By: Jagran