रेल मंत्रालय का रेलवे के अधिकारीयों को करार झटका, जानिए कैसे हुआ यह

स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट (एसआरएम) के मामले में अफसरशाही को रेल मंत्रालय ने झटका दिया है। यह पद समाप्त करने के अंबाला और फिरोजपुर के डीआरएम के प्रस्ताव के बीच मंत्रालय ने एक साल का सेवा विस्तार दे दिया है। देशभर के सभी ङ्क्षप्रसिपल चीफ कॉमर्शियल मैनेजर को आदेश जारी किए गए हैं।

रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी जोन को जारी किए आदेश, चेकिंग पर असमंजस

बोर्ड ने भले ही रेलवे मजिस्ट्रेट के पद बरकरार रखे हैं, लेकिन दूसरे राज्यों में एसआरएम खुद या फिर रेलवे के साथ संयुक्त चेकिंग कर सकेंगे, इस पर गोलमोल कर दिया गया है। आदेशों में यही कहा गया है कि एसआरएम के पास ट्रायल चलेगा।

यूं सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद








एसआरएम (हरियाणा) नितिन राज ने कैंप कोर्ट लगाने के लिए 29 व 30 सितंबर 2016 को टीटीई मांगे थे, जो रेलवे ने नहीं दिए। मजिस्ट्रेट ने सीनियर डीसीएम रहीं प्रवीण गौड़ द्विवेदी को 15 अक्टूबर और फिर 18 अक्टूबर को अपना पक्ष रखने के लिए पेश होने को कहा, लेकिन वह पेश नहीं हुईं। गौड़ की तरफ से दाखिल किए गए जवाब को एसआरएम ने खारिज कर उनके खिलाफ केस चलाने के लिए फाइल सीजेएम कोर्ट भेज दी।




महिला अधिकारी इसके खिलाफ एडिशनल सेशन कोर्ट व फिर हाई कोर्ट गई, लेकिन दोनों जगह से याचिका खारिज हो गईं। हाई कोर्ट ने एक माह के अंदर एसआरएम स्कवॉड को 10 टीटीई व छह महीने में अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। हाई कोर्ट ने उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक और रेलवे बोर्ड के सचिव पर सच छिपाने के लिए भी टिप्पणी की थी। इस फैसले के खिलाफ रेलवे सुप्रीम कोर्ट में चला गया, जहां स्टे के बाद मामला विचाराधीन है।




1982 के आदेश का किया गया जिक्र

– मजिस्ट्रेट स्कीम को 31 दिसंबर 2019 तक एक्सटेंशन देने के लिए रेल मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस पत्र में 1982 का हवाला भी दे रखा है। अंबाला और फिरोजपुर मंडल के अधिकारियों की सिफारिश को उत्तर रेलवे ने भी अपनी मोहर लगाते रेलवे बोर्ड भेज दिया था।

Source:- Jagran