इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि, मृतक आश्रित सेवा नियमावली के नियम 5 के अंतर्गत आश्रित की नियुक्ति उसकी योग्यता के अनुसार की जानी चाहिए न कि मृतक कर्मचारी के पद के सापेक्ष। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस रेडियो विभाग में मैसेंजर की आश्रित पत्नी को उसकी योग्यता के अनुसार तृतीय श्रेणी पद पर नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस सीडी सिंह की खंडपीठ ने प्रेमलता की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।








याची के पति अविनाश कुमार की सेवाकाल में मृत्यु हो गयी। वह पुलिस विभाग में मैसेंजर थे। याची ने आश्रित कोटे में नियुक्ति की अर्जी दी तो कहा गया कि, उसके पास आईटीआई डिग्री नहीं है। इसके बाद उसने दरोगा पद पर नियुक्ति की मांग की तो चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव दिया गया। तब उसने याचिका दाखिल कर अपनी योग्यता के आधार पर नियम-5 के तहत नियुक्ति की मांग की। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी तो अपील दाखिल की गई थी। कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को रद कर दिया और याचिका मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि, ऐसा नहीं है कि तृतीय श्रेणी का पद खाली नहीं है। ऐसे में तृतीय श्रेणी के पद पर नियुक्ति की जा सकती है।




आश्रित के रूप में नौकरी की मांग में अर्जी दी विभाग ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि, याची के पति सेवा में नहीं थे। हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर कोर्ट ने पुलिस विभाग को नए सिरे से सकारण निर्णय लेने का निर्देश दिया। विभाग ने कहा कि, परिवार में मृतक की विधवा पुत्रवधु शामिल है। कर्मी की मृत्यु के समय याची विधवा नहीं थी। विभाग ने हाई कोर्ट की पूर्णपीठ के शिव कुमार दुबे केस के फैसले के सिद्धांतों के आधार पर 1 सितंबर 2018 को अर्जी खारिज कर दी, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। जस्टिस यशवंत वर्मा ने याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया। जिसे विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।

स्वार्थ में याचिका 

हाई कोर्ट ने कहा है कि सभी को नौकरी का समान अवसर मिले यह सामान्य अधिकार है। मृतक कर्मचारी के आश्रित को नियुक्ति मिले यह सामान्य अधिकार का अपवाद है। मृतक आश्रित सेवा नियमावली का उद्देश्य आश्रित के लिए पद आरक्षित करना नहीं है। यह कर्मचारी की मौत से परिवार पर आई तात्कालिक विपत्ति का सामना करने की एक अनुकम्पा नियुक्ति है। यह सामान्य नियम का अपवाद है। इससे आश्रित को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। इसके साथ ही कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में समान पद पर नियुक्ति की मांग को अपवाद मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही एकलपीठ के फैसले को सही करार देते हुए आदेश के खिलाफ विशेष अपील खारिज कर दी है।




सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़कर 60 वर्ष करने के फैसले को विधि विरुद्ध करार देने जैसे कई सुधारात्मक आदेश दिए।

यह आदेश जस्टिस भारती सप्रू तथा जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने मीरजापुर की पूनम यादव की अपील पर दिया है। अपील में कहा गया कि, सरकार आश्रित के लिए अनिश्चित समय तक पद आरक्षित नहीं रख सकती। एक निश्चित अवधि में दाखिल अर्जी पर ही विचार हो सकता है।

ससुर की पुलिस विभाग में सेवा के दौरान 22 दिसम्बर 1999 को मौत हो गयी। याची के पति ने 2004 में मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग में अर्जी दी।