7वें वेतन आयोग के तहत कुछ सरकारी कर्मचारियों को दिसंबर में बढ़कर सैलरी मिलेगी। दरअसल भारतीय रेल कर्मचारियों को 7th Pay Commission के तहत घोषित ड्रेस अलाउंस अगले महीने से ड्रेस अलाउंस सैलरी में जुड़कर मिलने लगेगी। रेल कर्मी लम्बे समय से ड्रेस अलाउंस दिए जाने की मांग कर रहे थे।

बड़ी जीत मान रहे रेल कर्मचारी
रेलवे प्रशासन ने रेल कर्मियों को दिसंबर की सैलरी में पिछले दो सालों का ड्रेस अलाउंस देगा। कर्मचारियों को आदेश की प्रति देने के साथ ही उन्हें बताया गया कि अगले महीने के वेतन में उनका ड्रेस अलाउंस जोड़ कर उनको दे दिया जाएगा।गौरतलब है कि रेल कर्मचारी अपनी 47 सूत्रीय मांगों को ले कर काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में ड्रेस अलाउंस दिए जाने के आदेश जारी होने पर वे इसे बड़ी जीत मान रहे हैं।








7th Pay Commission:आखिरकार इन केंद्रीय कर्मचारियों की हुई जीत, दिसंबर में बढ़कर मिलेगी सैलरी!

जयपुर। सातवे वेतन आयोग को लेकर पिछले समय से कई सरकारी कर्मचारी अपनी अलग अलग मांग रख रहे थे और इन मांगों को लेकर सरकार को कई बार आम जनता का गुस्सा भी झेलना पड़ा है। कई बार ऐसा देखा गया है की कर्मचारी अपने सातवे वेतन आयोग को लेकर सरकार के सामने अपना विरोध जाता चुके है।




अब इस मामले में इस कर्मचारियों की एक बड़ी जीत हुई है, सरकार ने इस सातवे वेतन आयोग में कर्मचारियों की एक बड़ी बात मांग ली है। सरकार ने अब रेलवे के कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है, सरकार ने हाल ही सभी रेलवे कर्मचारियों को ड्रेस अलाउंस देने का फैसला किया है, जिसके बाद से सभी कर्मचारियों को अब अधिक वेतन मिलेगा।

इस बात के लिए कर्मचारी पिछले लम्बे समय से मांग कर रहे थे जिसे सरकार ने अब जाकर पूरा किया है।  प्रशासन ने साफ किया है कि दिसंबर की सैलरी में उन्हें दो सालों का ड्रेस अलाउंस जोड़कर मिलेगा। रेल कर्मचारी इसे अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं। यानि सभी कर्मचारियों को पिछले बकाया भी इस बार एक साथ में मिलेगा।




मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 7th Pay Commission की सिफारिश के तहत सामान्य रेल कर्मियों को ड्रेस अलाउंस के तहत 5000 रुपए और ट्रैफिक या रेल गाड़ियों के परिचालन से जुड़े कर्मचारियों को 10000 रुपए भत्ता दिया जाएंगा।

आपको  बता दे की पिछले लम्बे समय से सभी कर्मचारियों की मांग थी की उनकी जो 47 सूत्रीय मांग है उसे पूरा किया जाएं। जिसके बाद कहा जा रहा है की सरकार ने दबाव में ये निर्णय लिया है।