थाइलैंड की सैर पर निकले टूर में 20 महिला, 28 पुरुष कर्मचारी शामिल हैं, जबकि 4 अन्य टूर कॉर्डिनेटर हैं। 29 नवंबर तक इन लोगों को बैंकॉक और पटाया की सैर कराई जाएगी। इसमें थाइलैंड के सभी मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन को शामिल किया गया है। टूर में शामिल अधिकारी ने बताया कि टीम के किसी भी सदस्य ने इससे पहले विदेशी यात्रा नहीं की थी, इनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
कर्मचारियों के लिए खुशी का मौका








पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक ए.के.गुप्ता ने पूरी 52 सदस्यों वाली टीम की बस को हरी झंडी दिखाकर चर्चगेट मुख्यालय से रवाना किया। इस दौरान उन्होंने सभी स्टाफ से बात की। गुप्ता ने बताया कि विदेशी दौरे पर जाने वाले हर एक सदस्य के जीवन का यह खास मौका था। कई सदस्यों ने बताया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा कि रेलवे द्वारा उन्हें विदेशी दौरे पर भेजा जाएगा। इस ग्रुप में रेलवे के लगभग सभी विभाग के चुनिंदा कर्मचारी मौजूद थे और जिन्होंने भी विदेशी दौरे के लिए अर्जी दी, उसे मंजूर कर लिया गया।




पश्चिम रेलवे ने अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 52 सदस्यों वाले दल को थाइलैंड की सैर के लिए भेजा है। भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब गैंगमेन, ट्रैकमेन या कोई सफाईकर्मी रेलवे द्वारा विदेश की सैर करने के लिए भेजा गया हो। शनिवार को रवाना हुआ ये दल पांच दिन की सैर करके मुंबई लौटेगा।

स्टाफ वेलफेयर से हुआ काम

पश्चिम रेलवे ने टूर ऐंड ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक से थाइलैंड की यात्रा के लिए टाइअप किया। थॉमस कुक ने इन चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए रियायती दरों में रेलवे को पैकेज ऑफर किया। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि ऐसा पहली बार होगा, जब स्टाफ वेलफेयर फंड का इस्तेमाल कर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को किसी विदेशी टूर पर भेजा गया हो।




इस टूर के लिए कर्मचारियों से कुल खर्च का केवल 33 प्रतिशत हिस्सा लिया गया। रेलवे की ओर से टी-शर्ट, कैप और ट्रॉली बैग देकर इन्हें रवाना किया गया।

सरकारी सैर पहली बार ऐसे टूर का आयोजन, 52 सदस्यों का दल

मुंबई के कठिन हालात में काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी स्टाफ को विदेशी दौरे पर भेजने का काम पहली बार हुआ है। इनमें से कई स्टाफ का कहना था कि उन्होंने जीवन में कभी पासपोर्ट बनाने के बारे में भी नहीं सोचा था। विदेशी यात्रा उनके लिए सपना सच होने के समान है।’

– ए.के.गुप्ता, महाप्रबंधक