भारत सरकार की पेंशन स्कीम ‘नैशनल पेंशन स्कीम’ (NPS) में कर्मचारियों को अपनी सैलरी का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से बचत के लिए देता है, जिसे वह रिटायर होने पर एकमुश्त पा सकते हैं। NPS आपके लिए रिटायरमेंट के बाद एक बेहतर ज़िंदगी का प्रबंध करती है। नैशनल पेंशन स्कीम एक तरह से आपके बुढ़ापे को सुरक्षित करने की व्यवस्थित योजना है।








NPS के सारे ऑपरेशन ‘पेंशन फंड रेग्युलेटरी ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी’ (PFRDA) मैनेज करती है। 

यह जग-ज़ाहिर बात है कि NPS के तहत लोग अपनी सैलरी का जो हिस्सा देते हैं, उसे बाज़ार में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग रिस्क के साथ निवेश किया जाता है। इसका एक मकसद यह भी है कि पैसा बढ़ता रहा। तो पेंशन स्कीम कोई निश्चित संख्या नहीं बताती है कि वह इतना ब्याज तो देगी ही। लेकिन, आमतौर पर NPS स्कीम के सब्सक्राइबर्स को 12 से 14% तक ब्याज मिल ही जाता है। इतने रिटर्न से मतलब है कि यह निवेश के दूसरे साधनों से बेहतर है।








PFRDA की वेबसाइट कहती है कि NPS में आपको निवेश के अलग-अलग विकल्प मिलते हैं और आप फंड मैनेजर की सेवा भी ले सकते हैं, तो आपके पैसे को तर्कपूर्ण तरह से मार्केट में लगाएगा और आपका पैसा बढ़ेगा। आप बीच में कभी भी अपने निवेश की दिशा बदल सकते हैं या फंड मैनेजर भी बदल सकते हैं, जिससे आप और विकल्पों का लाभ उठा सकें। यह ज़रूर याद रखिए कि NPS पर मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहता है।