प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की समय-सीमा को समाप्त कर जितने दिन काम, उतने दिन के लिए ग्रेच्युटी देने के फॉर्मूले अंतिम मुहर लग सकती है। दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहयोगी संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इसके लिए सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। साथ ही सरकार से ग्रेच्युटी के लिए कार्य अवधि की समय-सीमा समाप्त करने की मांग की है। बीएमएस ने सरकार से कहा कि कर्मचारियों के हितों को देखते हुए सरकार ऐसी व्यवस्था करें कि कर्मचारी किसी संस्थान या किसी कंपनी में जितने दिन, माह या जितने साल काम करे उस हिसाब से उसे ग्रेच्युटी मिले। मौजूदा नियम के तहत किसी भी संस्थान या कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी को 5 साल की नौकरी पूरी होने पर ही ग्रेच्युटी मिलती है।









बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने एनबीटी से बातचीत में इस बारे में सरकार के साथ बातचीत जारी है। इस बारे में लेबर मिनिस्ट्री के साथ एक बैठक हो चुकी है, जल्द ही अगली बैठक भी होगी।

उन्होंने कहा कि इस वक्त ज्यादातर संस्थाएं आैर कंपनियां कांट्रैक्ट कर्मचारियों की भर्तियों पर ज्यादा फाेकस कर रही है। अगर सरकार ने ग्रेच्युटी पाने के लिए समय-सीमा 5 साल से कम करके 3 साल कर भी दिया तो इस पर भी खेल हाे सकता है। उसके बाद कोई भी कर्मचारियों को तीन साल के लिए कांट्रैक्ट पर नहीं रखेगा। इससे कम समय के लिए कर्मचारियों की भर्तियां शुरू हो जाएंगी।







बीएमएस की मांग है कि सरकार पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट-1972 में बदलाव करें आैर ग्रेच्युटी के लिए कोई समय-सीमा न रखे। विरजेश उपाध्याय के मुताबिक, इससे दो अहम बदलाव होंगे। एक तो कंपनियां जल्द कर्मचारियों को निकालेगी नहीं। दूसरा,कर्मचारी को भी नौकरियां बदलने में कोई समस्या नहीं होगी। यह फॉर्मूला कर्मचारियों के लिए हितकर रहेगा।
ग्रेच्युटी पाने की समय-सीमा हटाने पर चल रहा विचार!