देश में सेवानिवृत्त हो चुके तेज तर्रार अफसरों के अनुभव से रेलवे तरक्की की ट्रैक पर दौड़ेगी। रेलवे का आर्थिक साम्राज्य मजबूत होने के साथ ही ट्रेनें लोगों को निर्धारित समय मंजिल पर पहुंचा सकेंगी। रेलवे बोर्ड के इजीक्यूटिव डायरेक्टर पे कमिशन एस बालचंद्रा लायर ने सभी 17 जोनों के महाप्रबंधक की तीन सदस्यीय समिति अफसरों की एक वर्ष के लिए नियुक्ति कर सकेगी। नई व्यवस्था में 65 वर्ष से ज्यादा के अधिकारियों का समायोजन नहीं किया जा सकेगा।








रेलवे को पड़ी जरूरत

साल-दर-साल ट्रेनों की संख्या बढ़ती जा रही है। उस मुताबिक निचले स्तर पर उच्चाधिकारियों की कमी महसूस होने लगी है। कार्यों के बोझ तले अफसरों के दबने के कारण गुणवत्ता प्रभावित होने लगी थी। रेल प्रशासन ने गुणवत्ता बनाए रखने को पहले ही एक-एक विभाग में अलग-अलग कार्यों के लिए कई-कई क्लास वन रैंक के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने लगा है। अफसरों की कमी महसूस होने पर पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में सेवानिवृत्त अफसरों के पुनर्नियोजन को हरी झंडी मिल सकी है।




विभागों में ‘कंसल्टेंट’ होगा पद नाम

एक वर्ष के लिए नियुक्ति पाने वाले अफसरों के नाम कंस्ल्टेंट होंगा। उन्हें जिस विभाग में नियुक्ति मिलेगी उसे पदनाम के आगे जोड़ दिया जाएगा। मसलन, कंसल्टेंट मेडिकल, कंसल्टेंट इंजीनियर … इत्यादि। नियुक्ति भी जूनियर स्केल में की जाएगी। एक वर्ष के बाद जरूरत पड़ने पर रिव्यू किए जा सकेंगे। मैन पॉवर बढ़ने पर रेलवे बोर्ड निर्णय को वापस ले सकता है।




नियुक्ति की कुछ ऐसी होंगी शर्तें

उम्र अधिकतम 65 वर्ष होनी चाहिए।
एचआरए, टीए, आवास की सुविधा नहीं मिलेगी।
निरीक्षण, निलंबन करेंगे, लेकिन किसी विभाग के मुखिया नहीं बनेंगे।
एक वर्ष में 12 अवकाश मिलेंगे।
पुनर्नियोजन को दुबारा नियुक्ति नहीं समझी जाएगी।