रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें 1 नवंबर से 302 किलो की तिजोरी से छुटकारा मिल जाएगा। इस संबंध में 25 अक्तूबर को दिल्ली मंडल का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अनुबंध हुआ है।

अब खुद बैंककर्मी दिल्ली मंडल के सभी 160 स्टेशनों से नकदी लेकर जाएंगे और बैंक शाखाओं में जमा कराएंगे। इसकी शुरुआत पहले नई दिल्ली स्टेशन से होगी। दिसंबर के अंत तक सभी स्टेशनों पर इसे लागू कर दिया जाएगा। इसे हाइब्रिड रेल शक्ति स्कीम नाम दिया गया है।








लूटपाट का खतरा : अभी तक कर्मचारी टिकट, पार्सल बुकिंग आदि से एकत्रित नकदी 302 किलो वजनी कैश सेफ में रखकर बैंक में जमा करवाने ले जाते थे। इसे रास्ते में लूटपाट का खतरा भी बना रहता है। हालांकि, यह सेफ काफी सुरक्षित होती है। इसमें पीतल के बने छह लॉक होते हैं। चाबी के अलावा इसे खोलने का कोई विकल्प नहीं होता। इसे केवल वेल्डिंग से काटा जा सकता है, लेकिन उसमें नोट जलने की आशंका होती है।

दूसरे कामों में लगेंगे कर्मी : इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद इन स्टेशनों पर इस काम में तैनात करीब 650 से अधिक कर्मचारियों को दूसरे काम में लगाया जा सकेगा। साथ ही उनकी सुरक्षा जैसी चिंता भी खत्म हो जाएगी। इससे पहले उत्तर रेलवे के अंबाला और लखनऊ में यह सेवा शुरू हो चुकी है।




रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें 1 नवंबर से 302 किलो की तिजोरी से छुटकारा मिल जाएगा। इस संबंध में 25 अक्तूबर को दिल्ली मंडल का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अनुबंध हुआ है।.

अब खुद बैंककर्मी दिल्ली मंडल के सभी 160 स्टेशनों से नकदी लेकर जाएंगे और बैंक शाखाओं में जमा कराएंगे। इसकी शुरुआत पहले नई दिल्ली स्टेशन से होगी। दिसंबर के अंत तक सभी स्टेशनों पर इसे लागू कर दिया जाएगा। इसे हाइब्रिड रेल शक्ति स्कीम नाम दिया गया है। .

लूटपाट का खतरा : अभी तक कर्मचारी टिकट, पार्सल बुकिंग आदि से एकत्रित नकदी 302 किलो वजनी कैश सेफ में रखकर बैंक में जमा करवाने ले जाते थे। इसे रास्ते में लूटपाट का खतरा भी बना रहता है। हालांकि, यह सेफ काफी सुरक्षित होती है। इसमें पीतल के बने छह लॉक होते हैं। चाबी के अलावा इसे खोलने का कोई विकल्प नहीं होता। इसे केवल वेल्डिंग से काटा जा सकता है, लेकिन उसमें नोट जलने की आशंका होती है।




दूसरे कामों में लगेंगे कर्मी : इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद इन स्टेशनों पर इस काम में तैनात करीब 650 से अधिक कर्मचारियों को दूसरे काम में लगाया जा सकेगा। साथ ही उनकी सुरक्षा जैसी चिंता भी खत्म हो जाएगी। इससे पहले उत्तर रेलवे के अंबाला और लखनऊ में यह सेवा शुरू हो चुकी है।