रेल पटरियों की जांच करके रेल परिचालन को सुरक्षित बनाने वाले कर्मचारी अब ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने बच्चों को नौकरी नहीं दिला सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने बुधवार को निर्देश जारी कर दिया है। वहीं, रेलवे कर्मचारी यूनियनों ने इसका विरोध किया है। इस फैसले को चुनौती देने के लिए उन्होंने फिर से सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला किया है। रेलवे पटरियों की निगरानी करने वाले ट्रैक मैन, की मैन, गैंगमैन, पेट्रोल मैन आदि को अब लारजेस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना के तहत रेलवे में कार्यरत वर्ग डी (संरक्षा से जुड़े) कर्मचारी 50 से 55 साल की उम्र में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने पुत्र या पुत्री को नौकरी दिला सकते थे।








उन्हें अनुकंपा के आधार पर सीधी नियुक्ति मिल जाती थी। इस योजना के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में शिकायत की गई थी। हाई कोर्ट ने 2016 में रेलवे की इस योजना को कानून के समक्ष समता और सरकारी नौकरी में समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन बताया था। 1बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने इस योजना को बंद करने का फैसला कर लिया है।




रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनल रेलवे को जारी पत्र के अनुसार 27 अक्टूबर, 2017 के बाद से इस आदेश को लागू माना जाएगा। 1लारजेस योजना के तहत ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारी के पुत्र या पुत्री को मंडल स्तर पर ही नौकरी मिल जाती थी। इस योजना का लाभ उठाने वाले रेलकर्मी लिखित में आवेदन करते थे कि वे अब ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेना चाहते हैं, उनकी जगह उनके पुत्र या पुत्री को नौकरी दी जाए। इसके बाद मेडिकल के पैमाने पर खरा उतरने वालों को नौकरी दे दी जाती थी।




बोर्ड के इस फैसले का नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मैन ने विरोध किया है। यूनियन के प्रवक्ता एसएन मलिक ने कहा कि यह कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है। यूनियन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में फिर से चुनौती देगी।

>संरक्षा से जुड़े कर्मियों को मिलता था इसका लाभ

>अदालत के निर्णय के आधार पर बोर्ड ने लगाई रोक