रेलमंत्री पीयूष गोयल, सीआरबी अश्विनी लोहानी सहित रेलवे का पूरा अमला ट्रेनों के सेफ ऑपरेशन के लिए नित नए काम कर रहा है। लगातार ट्रेनों के लेट होने पर भी रेलवे सेफ्टी को बड़ा मुद्दा बताते हुए, ट्रेनों का समय पर संचालन करने से बच रहा है। रेलवे बोर्ड से महज 350 किलोमीटर दूर रेलवे का उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय सेफ्टी के इस मुद्दे पर गंभीर होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 4 जुलाई को फुलेरा में हुए रेल हादसे में रेलवे प्रशासन की एक बडी चूक सामने आई है। रेलवे ने प्रति ट्रेन 5-7 मिनट बचाने के लिए सेफ्टी नियमों को दरकिनार कर दिया। जिसके चलते जयपुर-फुलेरा के बीच करीब 36 घंटे यातायात बाधित रहा।








बुधवार को फुलेरा स्टेशन पर पूजा सुपरफास्ट के चार कोच बेपटरी हो गए थे। रेलवे द्वारा तीन कोच को ही बेपटरी होना बताया गया था। मामले में रेलवे ने प्रथम दृष्टया में ऑन ड्यूटी स्टेशन मास्टर की लापरवाही मानते हुए, उसे सस्पेंड कर दिया है। वहीं उत्तर पश्चिम रेलवे के जीएम टीपी सिंह ने मामले की जांच के लिए चीफ सेफ्टी ऑफिसर (सीएसओ) की अध्यक्षता में एसएजी स्तर की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में सीएसओ सहित सीपीटीएम और सीएसई भी हैं। कमेटी 10 दिन में जांच कर जीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हादसे के चलते 36 घंटे तक जयपुर से जोधपुर, अजमेर और बीकानेर के बीच ट्रेनों का संचालन बाधित रहा था।




2 लापरवाही… जिसने सैंकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल दी
पूजा सुपरफास्ट हादसा | शुक्र है… 3 डिब्बे पटरी से उतरे, पलटे नहीं…
2 ट्रेने रद्द रहीं, 4 आंशिक रद्द, 4 ट्रेनों को रेगुलेट-2 को री-शेडूयल िकया, 17 ट्रेनें 20 घंटे लेट रहीं, 50 हजार यात्री परेशान हुए
ये किया…फुलेरा में यार्ड री-मॉडलिंग के चलते नॉन-इंटरलॉकिंग का काम हो रहा था। ट्रेन ऑपरेशन मैनुअल था। रेलवे ने संचालन के लिए ट्रैफिक वर्किंग ऑर्डर जारी किया गया। इस ऑर्डर में रेलवे ने समय बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन को पॉइंट्स को क्लैम्प किए बिना ही ट्रेन संचालित करने को कहा। जब ट्रेन फुलेरा से रवाना हुई तो रेवाड़ी की ओर से भी एक ट्रेन फुलेरा आने वाली थी। ऐसे में ऑन ड्यूटी स्टेशन मास्टर ने गुमटी से प्राइवेट नंबर एक्सचेंज किए बिना ही पॉइंट चेंज किया। नतीजा- 3 डिब्बे बेपटरी हुए।




धीमी गति और एलएचबी कोच से बचीं हजारों जिंदगियां… फुलेरा में कॉशन ऑर्डर होने के कारण वहां से सभी ट्रेनों को धीमी गति से निकाला जा रहा था। पूजा सुपरफास्ट की भी गति धीमी होने एवं ट्रेन में एलएचबी कोच लगे होने की वजह से कोई हताहत नहीं हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि एलएचबी कोच पुराने परंपरागत कोच की अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होते हैं।

2स्टेशन मास्टर भी गैर-जिम्मेदार रवैया, प्राइवेट नंबर एक्सचेंज किए बिना पॉइंट चेंज किया, हादसे केे बाद ट्रेनों का शेड्यूल बिगड़ा

करना ये था…जब ट्रेन ऑपरेशन ऑटोमैटिक से मैनुअल किया जाता है तो सिग्नल और पॉइंट्स एक-दूसरे से डिस्कनेक्ट हो जाते हैं। पॉइंट्स को मैनुअली क्लैम्प करने के लिए वहां एक गुमटी बनाई जाती है, क्योंकि रेलवे ने समय बचाने के लिए पॉइंट्स को बिना क्लैम्प किए ही ट्रेन संचालन का निर्देश दिया हुआ था। स्टेशन मास्टर ने गुमटी से प्राइवेट नंबर एक्सचेंज किए बिना ही पॉइंट चेंज किया। अगर क्लैम्प लगा होता तो पॉइंट चेंज नहीं होता और हादसा नहीं होता।