चुनावी साल में केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को लुभाने के लिए खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी बढ़ा दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा किया है. सरकार के इस फैसले से 7वें वेतन आयोग के इतर न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग कर रहे लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीद जगी है. Sen Times की खबर के अनुसार 2019 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी 15 अगस्त को लाल किले की दीवार से केंद्रीय कर्मचारियों की मांग को मानते हुए न्यूनतम वेतन वृद्धि का एलान कर सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी वेतन वृद्धि के साथ ही रिटायरमेंट की उम्र को लेकर भी बड़ा एलान कर सकते हैं.








हालांकि वित्त राज्यमंत्री 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से इतर सैलरी बढ़ाने की किसी भी प्रकार की योजना से इनकार कर चुके हैं. 7वें वेतन आयोग के इतर न्यूनतम वेतन वृद्धि को लेकर मीडिया में चल रही रिपोर्ट को खारिज करते हुए वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने कहा कि फिलहाल सरकार इस बारे में कोई विचार नहीं कर रही है.




लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के बाद एक बार फिर उम्मीद जगी है. सरकार के इस फैसले से मालूम पड़ता है कि सरकार के पास पर्याप्त पैसा है, अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है. कई लोगों को लगता है कि न्यूनतम समर्थन बढ़ाना बस एक शुरुआत है. चुनावी साल में वोटरों को लुभाने के लिए सरकार इस तरह के और कई फैसले कर सकती है.




मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 15 अगस्त को पीएम मोदी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा ऐलान कर सकते हैं. केंद्रीय कर्माचारी लंबे समय से सातवें वेतन आयोग से इतर अपनी बेसिक सैलरी में वृद्धि की मांग कर रहे हैं. पीएम मोदी आने वाले दिनों में केंद्रीय कर्मचारियों की उम्रसीमा को लेकर भी कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं. कहा जा रहा है कि बेसिक सैलरी में वृद्धि के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल कर सकते हैं. केंद्रीय कर्मचारियों को अभी बेसिक सैलरी में 2.57 के फिटमेंट फॉर्मूले के तहत सैलरी मिलती है.