नई दिल्ली: अगर आपको किसी काम के लिए सरकारी बाबुओं के सामने लगातार चक्कर लगाना पड़ता है, या फिर काम के बदले रिश्वत की मांग का सामना करना पड़ता है, तो आप उस अधिकारी का प्रमोशन रुकवा सकते हैं। सरकार ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें अधिकारियों का प्रमोशन पब्लिक फीडबैक पर आधारित होगा।








यानी अब यह लोगों के फीडबैक पर निर्भर करेगा कि अधिकारी को अच्छी ग्रेड मिले या नहीं। पीएमओ के निर्देश पर बने इस सिस्टम को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने अंतिम रूप दे दिया है। बहुत जल्द कैबिनेट के स्तर पर भी इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।




प्रस्ताव के अनुसार अधिकारियों के अप्रैजल और प्रमोशन में सबसे ज्यादा में 70 फीसदी वेटेज पब्लिक फीडबैक को दिया जाएगा। जिन विभागों का वास्ता सीधे आम लोगों से नहीं पड़ता, वहां यह 30 फीसदी होगा। मालूम हो कि सातवें वेतन आयोग के बाद केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोगेशन) में बदलाव किया था।




इसमें कहा गया था कि जिनका काम पैरामीटर पर नहीं होगा, उनका अप्रेजल या इन्क्रीमेंट नहीं होगा। साथ ही प्रमोशन पर भी इसका असर पड़ेगा। पहले ‘गुड’ ग्रेड रहने पर इन्क्रीमेंट और प्रमोशन मिलता था, लेकिन अब ‘वेरी गुड’ रहने पर मिलेगा। हालांकि यह साफ नहीं था कि ‘गुड’ और ‘वेरी गुड’ का फर्क कैसे होगा। सूत्रों के अनुसार इसी सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए इस तरह के कदम उठाए गए हैं।