पीक सीजन में हवाई किराये में पिछले साल की तुलना में इस बार 30 पर्सेंट की कमी आई है। किराये में कमी से फ्लाइट की बुकिंग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इससे एयरलाइन कंपनियों के प्रॉफिट पर दबाव भी बढ़ेगा।

अप्रैल महीना खत्म होने के साथ गर्मी की छुट्टियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान लोग घूमने जाते हैं। इससे ट्रैवल बिजनेस में तेजी आती है। इसे देखकर अक्सर एयरलाइंस किराया बढ़ा देती हैं, लेकिन अब इंडस्ट्री में कड़े मुकाबले की वजह से इसका उलटा हो रहा है। भारत में आज हवाई किराये दुनिया में सबसे कम हैं।







क्लीयरट्रिप के एयर एंड डिस्ट्रीब्यूशन हेड, बालू रामचंद्रन ने बताया, ‘टॉप टेन सेक्टर्स के लिए 2017 की तुलना में 2018 के अप्रैल और मई महीने में हवाई किराये में सालाना आधार पर 29 पर्सेंट की कमी हुई है। 2018 के लिए एवरेज किराया 3,292 रुपये है, जो हमारे हिसाब से पिछले तीन साल में सबसे कम है। ‘ वहीं, मेकमायट्रिप के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘यह ट्रेंड इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि क्योंकि ये किराये गर्मियों की छुट्टी के पीक ट्रैवल सीजन के हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय ट्रैवलर्स इसका पूरा फायदा उठाएंगे।’ मेकमायट्रिप रेवेन्यू के लिहाज से देश का सबसे बड़ा ट्रैवल पोर्टल है। एयरलाइन बुकिंग में एक और ट्रेंड दिख रहा है। एडवांस बुकिंग की तुलना में बुकिंग डेट के करीब किराए में कहीं अधिक तेजी से गिरावट आई है।



इस पर क्लीयरट्रिप के रामचंद्रन ने कहा, ‘2018 में 0-15 दिनों के लिए खरीदे गई टिकट के किराए में सालाना आधार पर 32 पर्सेंट की बड़ी गिरावट आई है। इसकी तुलना में 15 दिनों की एडवांस बुकिंग पर किराये सिर्फ 8 पर्सेंट कम हैं।’



एफसीएम ट्रैवल सॉल्यूशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रक्षित देसाई ने बताया कि इस साल पीक सीजन किराया पिछले 4 साल में सबसे कम है। एफसीएम ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइट सेंटर ट्रैवल ग्रुप की इंडियन सब्सिडियरी है। वहीं, यात्राडॉटकॉम के प्रेसिडेंट शरत ढल ने बताया, ‘2014 में हवाई किराये में 20 से 25 पर्सेंट की गिरावट आई थी। उसके बाद से इसमें हर साल 10 से 15 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिल रही है।’