लागू हो गए हैं ये छह नियम: कुछ से आपके पैसे बचेंगे तो कुछ से कटेंगे

1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया। इसके साथ में 1 फरवरी को संसद में पेश बजट में किए गए प्रावधान भी लागू हो गए हैं। कर प्रणाली में कुछ ऐसे बदलाव हुए हैं, जिससे आमलोगों का जीवन सीधे तौर पर प्रभावित होगा।








नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही नई कर प्रणाली भी लागू हो गई है। करदाताओं को कुछ मामलों में ज्यादा टैक्स का भुगतान करना होगा तो कुछ में सरकार की ओर से दी गई राहत भी अमल में आ गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से पेश बजट में बुजुर्गों को विशेष राहत दी गई है, वहीं निवेशकों को पहले के मुकाबले कमाई का ज्यादा हिस्सा कर के तौर पर भुगतान करना होगा। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दी गई राहत भी लागू हो गई है। वित्त वर्ष 2019 में नए बदलाव आमलोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगे।

लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स या एलटीसीजी: मोदी सरकार की ओर से 1 फरवरी को पेश आम बजट में शामिल प्रावधान लागू हो गए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को फिर से लागू करने की घोषणा की थी। नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही यह लागू हो गया है। अब तक शेयर बाजार में निवेश पर होने वाले लाभ पर टैक्स का भुगतान नहीं करना होता था, लेकिन इस बार से सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा का लाभ होने पर 10 फीसद कर का भुगतान करना होगा। नया प्रावधान 31 जनवरी, 2018 के बाद किए गए निवेश पर लागू होगा।

स्टैंडर्ड डिडक्शन: नौकरीपेशा लोगों को वित्त वर्ष 2019 में अपेक्षाकृत कम दस्तावेज तैयार करना होगा। सरकार ने बजट में 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन की व्यवस्था की है। अब कर में छूट प्राप्त करने के लिए ट्रांसपोर्ट एलाउंस (19,200 रुपये) और मेडिकल रिइबंर्समेंट (15,000 रुपये) का बिल जमा कराने का झंझट नहीं रहेगा।




बुजुर्गों को ब्याज पर कर में छूट: मोदी सरकार ने बुजुर्गों को कर में छूट देने का विशेष प्रावधान किया है। अब 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और डाकघर में जमा राशि पर सालाना 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कर नहीं देना होगा। इससे पहले आयकर के दायरे में आने वाले सभी बुजुर्गों के लिए यह सीमा 10,000 रुपये तक थी। इसमें अब 40 हजार रुपये की वृद्धि कर दी गई है।

बुजुर्गों को हेल्थ प्रीमियम में भी राहत: वरिष्ठ नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में भी राहत दी गई है। बुजुर्गों को धारा 80डी के तहत हेल्थ इंश्यारेंस प्रीमियम पर मिलने वाली छूट की सीमा को 50,000 रुपये तक कर दिया गया है। पिछले साल यह 30 हजार रुपये थी। इसके अलावा गंभीर बीमारियों के इलाज पर मिलने वाली छूट को भी 60,000 से बढ़ाकर 80,000 रुपये कर दिया गया है। वरिष्ठतम नागरिकों (80 वर्ष या उससे ज्यादा) के मामले में यह सीमा एक लाख रुपये तक होगी।




स्वरोजगार करने वालों को भी छूट: नेशनल पेंशन फंड (एनपीएस) में योगदान करने वाले कर्मचारी मैच्योरिटी या खाता बंद होने के दौरान बिना कर का भुगतान किए फंड में जमा राशि का 40 फीसद हिस्सा निकाल सकते हैं। अब यह सुविधा का विस्तार स्वरोजगार में लगे लोगों तक भी कर दिया गया है।

म्यूचुल फंड में निवेश करने वालों को देना होगा टैक्स: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को अब इक्विटी म्यूचुअल फंड के तहत होने वाली आय पर 10 फीसद का डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स देना होगा। मतलब निवेशकों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।

Source:- Jansatta