धनबाद : रेलवे के लाखों कर्मचारियों को तगड़ा झटका लगा है। न्यू पेंशन स्कीम यानी एनपीएस से राहत की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों की उम्मीदों पर रेल चढ़ गई है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है एनपीएस हटाना मुमकिन नहीं है। महकमे में कार्यरत सभी श्रेणियों के तकरीबन 40 फीसद कर्मचारी इससे प्रभावित होंगे। उन्हें पुरानी पेंशन योजना से वंचित रहना होगा।







एक जनवरी 2004 या उसके बाद रेलवे से जुड़ने वाले कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के दायरे में रखा गया है। इसे लेकर रेल यूनियनें लगातार आंदोलन कर रही हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआइआर) के आग्रह पर अप्रैल 2017 में तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त मंत्री को दोबारा पत्र भेजकर एनपीएस की समीक्षा की गुजारिश की थी। पत्र के जवाब में वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि मामले को लेकर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी को पुनर्विचार करने को कहा गया था जिसके जवाब बताया गया कि ऐसा करना मुमकिन नहीं है।



धनबाद सहित देशभर के सभी रेल मंडलों में एक जनवरी 2004 या उसके बाद रेलवे से जुड़ने वालों की संख्या लाखों में है। यूनियन नेताओं के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर रेल कर्मचारियों में आक्रोश है।

‘नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन की दिल्ली में आयोजित कार्यकारिणी बैठक में मंगलवार को इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होगी। रेलवे में एनपीएस हटाकर पुरानी पेंशन योजना लागू करने को फिर से पत्र भेजा जाएगा। आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार होगी।’




वहीँ इस मुद्दे पर आल इंडिया पर रेलवेमेंस फेडरेशन ने 13 मार्च को पार्लियामेंट का घेराव करने का निर्णय लिया है। महासचिव कामरेड शिव गोपाल मिश्र ने कहा है कि उनकी फेडरेशन इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठने वाली और रेलवे के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दिलवा कर ही दम लेगी। 1974 की हडताल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बोनस पर भी सरकार इस तरह मना कर रही थी लेकिन इंदिरा सरकार से AIRF ने लोहा लेकर बोनस दिलवाया था, नयी पेंशन स्कीम पर भी आर पार की लड़ाई होगी।
Source:- Jagran