श्रम मंत्री ने कहा, इसी महीने विधेयक के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी जरूरीविधेयक में ग्रेच्युटी 10 लाख से बढ़ाकर अधिकतम 20 लाख रपए की गई है
अगर ग्रेच्युटी भुगतान संशोधित विधेयक जल्द संसद से पारित नहीं हुआ तो इस महीने रिटायर होने वाले निजी क्षेत्र के बड़ी तादाद में कर्मचारियों को ग्रेच्युटी 20 लाख रु पए करने का लाभ नहीं मिल सकेगा। यही वजह है कि सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही जब हंगामे की वजह से बाधित हुई तो श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने विपक्ष से आग्रह किया कि ग्रेच्युटी विधेयक को बिना र्चचा के पारित कर दिया जाए।








ग्रेच्युटी से संबंधित विधेयक में ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रपए से बढ़ाकर अधिकतम 20 लाख रपए की गई है। सरकारी कर्मचारियों को यह लाभ पहले ही दिया जा चुका है, निजी क्षेत्र के लिए सरकार ने यह मंजूरी दे दी है, पर इसे संसद की मंजूरी मिलनी बाकी है। श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने पूछने पर कहा कि अगर 31 मार्च तक विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नहीं हो जाते हैं तो इस महीने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को बढ़ी हुई ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलेगा।




उन्होंने कहा कि ये ही वजह है कि उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकाजरुन खड़गे समेत विपक्ष के कई नेताओं से आग्रह भी किया कि वे इस विधेयक के तात्कालिक महत्व को समझें क्योंकि इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों का भविष्य जुड़ा है। ग्रेच्युटी 5 साल की नियमित नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ही मिलती है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष 15 दिन की मजदूरी को ग्रेच्युटी में जोड़ा जाता है। ग्रेच्युटी संशोधित विधेयक में ही महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का प्रावधान है।




प्रसूति अवकाश के दिन महिला कर्मचारियों की सेवा में भी जोड़े जाएंगे। संसद के बजट सत्र का सोमवार को पहला दिन था लेकिन श्रम और रोजगार मंत्री अभी इसको लेकर आास्त नहीं हैं कि आने वाले दिनों में ग्रेच्युटी संशोधन विधेयक पारित हो पाएगा। दरअसल उन्हें फिक्र है कि विपक्ष आगे कई दिन संसद की कार्यवाही को बाधित कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने विपक्ष के नेताओं से आग्रह किया था कि वे बिना र्चचा के ही ग्रेच्युटी संशोधित विधेयक को पारित करने में सहयोग दें क्योंकि ऐसा करना आवश्यक है।

Source:- Rashtriye Sahara