7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देने के बाद मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को एक खास तोहफा दिया है जिसमें 18 हजार न्यूनतम सैलरी केंन्द्रीय कर्मचारियों को दी जाएगी। हालांकि कर्मचारी संघ ने 7 सीपीसी की सिफारिशों को सिरे से नकार दिया है और ज्यादा सैलरी की मांग की है। इसके अलावा सरकार 7वें वेतन आयोग की सिफारिश में तय की गई न्यूनतम सैलरी को बिना बकाया राशि के बजट 2018 सत्र में बढ़ा सकती है।







सुत्रों के मुताबिक सरकार को 7वें वेतन आयोग द्वारा दिए गए सुझाव के बाद सैलरी की बढ़ोत्तरी अप्रैल में हो सकती है। सैलरी में बढ़ोत्तरी कम स्तर के कर्मचारियों को दी जाएगी। आपको बता दें कि सरकार द्वारा कोई बकाया राशि नहीं दी जाएगी। अप्रैल में वित्त मंत्री अरुण जेटली मंत्री मंडल के सामने ये प्रस्ताव पेश करेंगे।




7वें वेतन आयोग द्वारा की गई सिफारिश में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 18,000 कर दिया गया था। दरअसल सबसे ज्यादा सैलरी 90 हजार से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दी गई थी जो कि फिटमेंट फैक्टर में 2.5 गुना की बढ़ोत्तरी थी। आपको बता दें कि यूनियन ने मांग की है कि न्यूनतम सैलरी 26,000 रूपए होनी चाहिए जिसमें फिटमेंट फैक्टर 3.68 प्रतिशत होगा। हालांकि साल 2016 में कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे तब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों को ध्यान में रखा जाएगा.




युनियन ने यह कहा था कि न्यूनतम सैलरी 18 हजार बढ़ती मंहगाई में जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, उच्चतम से सबसे कम सैलरी का रेशियों 1:14 तक गिरा है, जो 6वें वेतन आयोग में 1:12 था।

हाल ही में ये बताया गया था कि सरकार आगामी बजट में संशोधित सैलरी के लिए आवंटन कर सकती है और अप्रैल में 7वें वेतन आयोग की सिफारिश के अलावा सैलरी भी बढ़ा सकती है।