सातवाँ वेतन आयोग – न्यूनतम वेतन बढ़ाने को लेकर एनएसी की हाँ और DoPT की आनाकानी

नयी दिल्ली:- सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अभी पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए नेशनल अनोमली कमेटी बनाई गई थी। यह कमेटी वेतन विसंगति को सुलझाने के लिए बनाई गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल अनोमली कमेटी ने डीओटीपी से केंद्रीय कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 18,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए करने की सिफारिश की थी। वहीं फिटमेंट फेक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.00 करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट्स की मानें तो सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे केवल उन्ही कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाई जाएगी, जो पे मैट्रिक्स लेवल 5 के अंतर्गत आते हैं।









रिपोर्ट्स की मानें तो डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओटीपी) एनएसी के उस प्रस्ताव के खिलाफ है, जिसमें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे केंद्रीय कर्माचारियों की सैलरी बढ़ाने की बात की गई है। हालांकि जूनियर लेवल के कर्मचारियों की सैलरी को बढ़ाने में कितना समय लगेगा इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई है।




सीनियर और मिड लेवल के कर्मचारियों की सैलरी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट्स की माने तो डीओटीपी ने साफ कर दिया है कि उन केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में कोई बदलाव नहीं होगा जो मैट्रिक्स लेवल 5 के दायरे में नहीं आते हैं। सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 14.27 फीसदी बेसिक पे बढ़ाने की सिफारिश की थी। वहीं फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना बढ़ाने की सिफारिश की थी। सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने के बाद न्यूनतम सैलरी 7,000 रुपए महीने से बढ़कर 18,000 रुपए महीने हो जाएगी।

वहीं अधिकतम सैलरी 80,000 रुपए महीने से बढ़कर 2.5 लाख रुपए हो जाएगी। इसे केबिनेट ने जून 2016 में ही मंजूरी दे दी थी। केंद्रीय कर्मचारियों की मांग है कि न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए महीने से बढ़ाकर 26,000 रुपए महीने किया जाए। वहीं फिटमेंट फेक्टर को 2.57 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुना कर दिया जाए।

एनपीएस और पक्की नौकरी पर कर्मचारी संघर्ष करेंगे

चंडीगढ़:- नैशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) को खत्म करने और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी संयुक्त संघर्ष करेंगे। इसकी रणनीति तय करने के लिए 28 जनवरी को रोहतक में राज्यस्तरीय सम्मेलन किया जाएगा। इसमें एनपीएस के दायरे में आने वाले और कच्चे कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के अलावा सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और केन्द्रीय कर्मचारी ऐंड वर्कर की कन्फेडरेशन की कार्यकारिणी के सदस्य शामिल होंगे। सम्मेलन को केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों के राष्ट्रीय नेता संबोधित करेंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर सिंह फोगाट और महासचिव सुभाष लांबा ने इसकी जानकारी दी।





क्यों है कर्मचारियों में आक्रोश: केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों पर जनवरी 2004 से और हरियाणा सरकार ने जनवरी 2006 से नई नैशनल पैंशन स्कीम लागू की है। स्कीम में कर्मचारी के मूल वेतन से 10 फीसदी रकम की कटौती की जाएगी। इतनी ही कटौती राज्य सरकार के खाते से भी होगी। रिटायरमेंट पर जमा की गई कुल रकम का 40 फीसदी कर्मचारी नकद दिया जाएगा और 60 फीसदी को शेयर मार्केट में लगाया जाएगा। मार्केट के उतार-चढ़ाव के हिसाब से पेंशन का भुगतान किया जाएगा।

इसके लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी डिवेलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) का गठन किया गया है। परिभाषित पेंशन स्कीम मे रिटायर होने वाला कर्मचारी को, जो अंतिम महीने का वेतन लिया, उसका 50 फीसदी पेंशन के रूप मे मिलने की गारंटी थी और इसके लिए कोई अतिरिक्त रकम भी नहीं कटती थी। सरकार ने सरकारी कर्मचारी की पेंशन की गारंटी को खत्म कर उसकी सामाजिक सुरक्षा छीन कर उसके आर्थिक हितों की गंभीर अनदेखी की है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के बावजूद एनपीएस को वापस नही लिया गया है।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने कहा कि चुनावी वादे के बावजूद मनोहर लाल सरकार न तो कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर रही है और न ही समान काम के लिए समान वेतन दे रही है। इससे कर्मचारियों मे सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है।