रेलवे अपने मिशन रफ्तार को मुकाम पर लाने के लिए चौतरफा काम में जुटा हुआ है। फिलहाल कोहरे की मार की वहज से ट्रेनों की रफ्तार धीमी है। कोहरे का दौर खत्म होने के बाद से ट्रेनों की रफ्तार दिखने लगेगी। इसके लिए रेलवे लघुकालिक और दीर्घकालिक दोनों योजनाओं को पटरी पर लाने में लगा हुआ है। इसका असर यह होगा कि मालगाड़ी, सवारी गाड़ी और यहां तक कि लोकल गाड़ी सभी की औसत रफ्तार में वृद्धि होगी।








रेलवे मिशन रफ्तार को हासिल करने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके लिए रेललाइन को बदलने, विद्युतीकरण करने, सिगनलिंग व संचार तथा ट्रेन के इंजन और कोच को अनुकूल बनाया जा रहा है। इसका असर यह होगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने के बाद से ट्रेनों की रफ्तार में वृद्धि होगी। इस सिलसिले में भी रेलवे अपने ट्रंक रूट को दुरुस्त कर रहा है।




रेलवे के 16 प्रतिशत रेल नेटवर्क पर बहुत सर्वाधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। जैसे दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-चेन्नई, चेन्नई-मुंबई, दिल्ली-चेन्नई और हावड़ा-मुंबई। रेलवे के ट्रंक रूट पर 58 प्रतिशत मालगाड़ियां चलती हैं जबकि 52 प्रतिशत ट्रेनें चलती हैं। इस सिलसिले में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही कहा था कि रेलवे जिस तरह से सभी इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में लगा हुआ है, यदि ट्रंक रूट के सभी काम पूरे हो गये तो रेलवे में आश्र्चयजनक बदलाव दिखने लगेगा।




इसके अलावा रेलवे सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के लायक कोच बनाने में लगा हुआ है। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों और मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के अलावा लोकल ट्रेनों की रफ्तार पर फोकस किया गया है। इसमें मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (मेमू) और डीजल मल्टीपल यूनिट (डेमू) की रफ्तार बढ़ाने के लिए नये रैक तैयार किये जा रहे हैं। इसके लिए रेल कोच फैक्टरी चेन्नई और कपूरथला में नये यूनिट लगाये गये हैं और इन यूनिटों में नये रैक बन रहे हैं।

Source:- Rashtriye Sahara