नववर्ष का जश्न अब पूरा हो गया है। जो लोग आयकर के दायरे में आते हैं उन्हें अब अपनी टैक्स प्लानिंग को अंतिम रूप दे देना चाहिए। जो लोग नौकरीपेशा से जुड़े हैं उनसे लेखा विभाग द्वारा टैक्स सेविंग के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान किए गए खर्च और निवेश का ब्योरा अब कभी भी मांगा जा सकता है। जिन लोगों ने यह काम अभी पूरा नहीं किया है उन्हें अच्छी तरह से प्लानिंग पूरी कर लेनी चाहिए।खर्च पर छूटआम धारणा है कि निवेश करने पर ही आयकर में कटौती का लाभ मिलता है। कुछ ऐसे खर्च भी हैं जिन पर कर छूट का लाभ मिलता है। ये खर्च आयकर अधिनियम की धारा 80सी में जोड़े जा सकते हैं। इसके 1.5 लाख रपए तक के खर्च पर कर कटौती का लाभ ले सकते हैं।








इस खर्च में दो बच्चों की पढ़ाई की ट्यूशन फीस शामिल है। यह छूट उन्हीं अभिभावकों को मिलेगी जिनके बच्चे रेगुलर शिक्षा ले रहे हैं। कोचिंग या निजी ट्यूशन की फीस के भुगतान पर छूट का लाभ नहीं मिलेगा। किताब या होस्टल के खर्च पर भी कोई लाभ नहीं मिलेगा। जिन लोगों ने होमलोन लेकर मकान खरीदा है वह ईएमआई में शामिल मूलधन के भुगतान पर कर कटौती का लाभ ले सकते हैं। वित्त वर्ष के दौरान मूलधन के भुगतान की राशि को अपनी सालाना आय में से घटा सकते हैं। इसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख रपए है।निवेश पर लाभसरकार बचत को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ योजनाओं में निवेश पर कर छूट का लाभ देती है। अच्छी प्लानिंग का जरिए इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। ज्यादातर योजनाओं में निवेश पर 80सी के तहत लाभ मिलता है।




इस रकम में कर्मचारी के वेतन से हर माह कटने वाला भविष्य निधि (ईपीएफ) भी शामिल होता है। पीपीएफ, एनएससी और सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर कर कटौती का लाभ ले सकते हैं। फिलहाल सुकन्या योजना में 8.1 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। जीवन बीमा पालिसी के प्रीमियम के रूप में साल में जो प्रीमियम का भुगतान करते हैं उसे अपनी सालाना आय से घटा सकते हैं। जीवन बीमा पर कर छूट का लाभ तभी मिलेगा जब बीमा कवर प्रीमियम की राशि से कम से कम दस गुना अधिक होना चाहिए।




जिन लोगों ने अपने करियर की शुरुआत जल्द में ही की है उन्हें टैक्स सेविंग के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में निवेश करना चाहिए। इस योजना में आकर्षक रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।कैसे बनाएं योजनाइस बात का विशेष ध्यान रखें कि धारा 80सी के तहत सिर्फ 1.5 लाख रपए तक के निवेश पर ही टैक्स सेविंग का लाभ मिलता है। यदि कोई व्यक्ति इस सीमा के बाद जीवन बीमा पालिसी या किसी अन्य वित्तीय उत्पाद में निवेश करता है तो उस पर कर कटौती का कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसीलिए सबसे पहले दो बच्चों की ट्यूशन फीस और ईपीएफ में जमा रकम को जोड़ें। इसके बाद जो गुंजाइश बचे उतनी ही रकम एलआईसी और पीपीएफ आदि योजनाओं में निवेश करें। अब इस काम को जितना जल्दी हो पूरा कर लें। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आपको मुसीबत में डाल सकता है।