रेलवे प्रशासन की ओर से ट्रेन दुर्घटना होने पर मौके पर ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत हादसे का सायरन बजते ही एक्सीडेंटल रिलीफ मेडिकल यान पांच से दस मिनट में ही चल देगी। 1ट्रेन हादसे के दौरान यात्रियों के इलाज की सुविधा न उपलब्ध होने से रेल प्रशासन की काफी किरकिरी होती है।

हालांकि वर्तमान में चिकित्सा सुविधा के लिए मेडिकल यान चलाई जाती है, लेकिन इसे चलाने के लिए इंजन लगाना पड़ता है। इसकी वजह से इसकी रवानगी में न्यूनतम आधे घंटे का वक्त लग जाता है। इसके अलावा दूसरी बात ये है कि इसमें घायलों के इलाज की कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। इसके मद्देनजर रेलवे प्रशासन ने चलता-फिरता अस्पताल यानी एक्सीडेंटल रिलीफ मेडिकल यान तैयार की है। खास बात ये है कि इसमें इंजन लगाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके आगे और पीछे दोनों ओर इंजन लगे होंगे। इसे चलाने के लिए दो की बजाय एक ही चालक की आवश्यकता पड़ेगी।








नए मेडिकल यान की गति भी अधिक होगी, जिससे कम समय में ही मेडिकल यान अधिक दूरी तय कर सकेगा। इस यान में आधुनिक ऑपरेशन रूम और अन्य उपकरणों की व्यवस्था है। इस ट्रेन में गंभीर घायल यात्रियों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने प्रत्येक रेल मंडल में एक्सीडेंटल रिलीफ मेडिकल यान उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। मंडल रेल प्रशासन इस यान का पहले ट्रायल करेगा। 1इसमें सफल होते ही इसे दुर्घटना राहत में शामिल कर लिया जाएगा। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि एक्सीडेंटल रिलीफ मेडिकल यान मिल गया है। यांत्रिक विभाग इसे चलाकर देख भी चुका है। शीघ्र ही संरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में यान का ट्रायल किया जाएगा। इसमें सफल होते ही हादसा होने पर इस यान को भेजा जाएगा




सुरक्षित ट्रेन संचालन और टूटी रेल लाइन से ट्रेन को दौड़ने से रोकने के लिए रेलवे प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत रात में अधिकारियों को भी रेल लाइनों की पेट्रोलिंग करने के आदेश दिए गए हैं। गुरुवार की रात मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने लोदीपुर रेल लाइन की पेट्रोलिंग की। 1मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि ठंड बढ़ने से रेलवे लाइनों के चटककर टूटने की संभावना सबसे अधिक होती है।




रात में पेट्रोलमैन से रेल लाइन की पेट्रोलिंग कराई जा रही है। इसके लिए उन्हें सीटी और लैंप दिया जाता है। गुजरने वाले ट्रेनों के चालक को लैंप से सिग्नल दिखाना पड़ता है और सीटी बजाकर अपनी उपस्थित बतानी पड़ती है। दिन में की मैन से पेट्रोलिंग कराई जाती है। पेट्रोल मैन व कीमैन को वर्दी-जूता आदि खरीदने को प्रत्येक साल पांच रुपये दिए जाते हैं।

कड़ाके की ठंड का असर 15 दिन तक रहने की संभावना है। इंजीनियरिंग के अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे भी रात में पेट्रोलिंग करें। पेट्रोलमैन की कार्य प्रणाली की जांच करें। पेट्रोलिंग में मंडल मुख्यालय के अधिकारी से लेकर रेल पथ निरीक्षक को भी लगाया गया है। गुरुवार रात में रेल लाइन का निरीक्षण करने स्वयं (डीआरएम) गए थे। पेट्रोल मैन व की मैन को जीपीएस सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए उपकरण की मांग मुख्यालय से की गई है।