रेल मंत्रलय ने यात्री ट्रेनों में बोगियों की मौजूदा अधिकतम संख्या को 26 से 22 करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से न केवल ट्रेनों की संख्या और रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि दुर्घटना की संभावनाएं भी घटेंगी। यही नहीं, इससे लंबी ट्रेनों की वजह से छोटे प्लेटफार्मो पर यात्रियों को चढ़ने-उतरने में होने वाली कठिनाई का भी समाधान हो जाएगा।








किसी भी ट्रेन को किसी भी रूट पर चलाया जा सकेगा।1रेलमंत्री पीयूष गोयल ने संवाददाताओं को इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमने सभी ट्रेनों को 22 कोच का करने का निर्णय लिया है। यह अधिकतम संख्या है। कुछ ट्रेनों में इससे कम कोच भी हो सकते हैं। 1गौरतलब है कि अभी यात्री ट्रेनों में अधिकतम 24 कोच लगाए जाते हैं।




मांग बढ़ने पर अपवाद में कुछ लोकप्रिय ट्रेनों में इनकी संख्या 26 भी कर दी जाती है। इससे ज्यादा कोच संरक्षा के लिहाज से उचित नहीं माने जाते। ज्यादातर कम लोकप्रिय ट्रेनों में 22, 18, 16 अथवा कभी-कभी 12 कोच ही लगते हैं। कोच की अधिकतम संख्या में कमी का लाभ लोकप्रिय ट्रेनों की संख्या में वृद्धि के रूप में मिलेगा। क्योंकि उतनी ही बोगियों से ज्यादा लोकप्रिय ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।




अभी कोच उत्पादन क्षमता सीमित होने से मनचाही संख्या में नई ट्रेनें चलाना संभव नहीं हो पाता। रेलवे की तीनों कोच फैक्टियां कपूरथला, चेन्नई व बरेली मिलकर सालाना लगभग चार हजार कोच का ही निर्माण कर पाती हैं। ऐसे में आगामी वर्षो में जब डेडीकेटेड फ्रेट कारतक पूरी तरह बदल देंगे रेलवे की सिग्नल प्रणाली : पीयूष गोयल

22 coaches