रेल मंत्रलय सिग्नल तोड़ने पर दशकों पुराने सख्त नियम में बदलाव करने जा रहा है। रेलवे में अब अंतरराष्ट्रीय नियम लागू होंगे। विदेशों में लाल सिग्नल तोड़ने पर ड्राइवर पर कार्रवाई नहीं की जाती है। जबकि भारतीय रेल में ट्रेन इंजन लाल सिग्नल से एक मीटर आगे निकल जाए और इससे रेल संपत्ति अथवा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ हो तब भी ड्राइवर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है। नए नियम में ऐसी स्थिति पर ड्राइवरों पर कोई अनुशानात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।








रेलवे बोर्ड ने 24 नवंबर 2017 को सिग्नल पास एट डैंजर (एसपीएडी) नियम में संशोधन के लिए कार्यकारी निदेशक (क्षमता व शोध) विकास आर्य की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। एसपीएडी का अर्थ है कि ट्रेन के इंजन ने लाल सिग्नल को छुआ अथवा सिग्नल से एक या दो मीटर आगे निकल गया तो इसे रेल प्रशासन रेल दुर्घटना मान लेती है। बतातें है कि रेलवे का एसपीएडी दुनिया का सबसे सख्त नियम है जिसमें ड्राइवर को नौकरी से निकाल दिया जाता है।





जबकि विश्व के किसी भी देश में बगैर ट्रेन हादसे, जानमाल का नुकसान के महज सिग्नल पार करने (एसपीएडी) पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है। इसलिए समिति इस नियम में बदलाव कर सकती है। एसपीएडी होने पर ट्रेन ड्राइवर पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि समिति दो हफ्ते बाद अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेगी। इस नियम में बदलाव करने की वकालत जनवरी 2017 में गठित टास्क फोर्स ऑन रेलवे सेफ्टी भी कर चुकी है।



ड्राइवर एसोसिएशन के संजय पांधी ने कहा कि ड्राइवरों पर काम का बोझ अधिक है। निर्धारित घंटे से अधिक ड्यूटी व छुट्टी नहीं मिलने से नींद पूरी नहीं होती है। थकान, अनिंद्रा, मानसिक तनाव सेपूरी मुस्तैदी से ट्रेन नहीं चला पाते हैं। इसके कारण दो साल में एसपीएडी के चलते 347 ड्राइवरों की नौकरी खतरे में थी। इतनी बड़ी संख्या में ड्राइवरों को निकालना आसान नहीं है। एसोसिएशन ने 2012 में नियम में ढील देने के लिए प्रस्ताव दिया था।

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