पदोन्नति में आरक्षण मामले में केंद्र पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 1997 से आरक्षण से पदोन्नति पाए कर्मचारियों की पदोन्नति वापस लेने का आदेश दिया था दिल्ली हाईकोर्ट ने

केंद्र ने आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में लगाई विशेष अनुमति याचिका
आखिरकार केंद्र सरकार हरकत में आयी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था और 1997 से इसके तहत पदोन्नति पाये कर्मचारियों से पदोन्नति वापस लेने का आदेश दिया था। आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों को रिवर्ट होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी है।








कार्मिक मंत्रालय ने सभी विभागों को एक सकरुलर भेजकर सूचित किया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अगस्त 2017 के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने मंत्रालयों से कहा है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कर्मचारियों को सूचित कर दें कि सरकार ने एसएलपी दायर कर दी है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में लाखों कर्मचारियों पर पदोन्नति खोने और जेब से पैसा भरने की लटकी तलवार थम गयी है।

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि पदोन्नति में आरक्षण कानूनी नहीं है। 1997 के बाद जितनी भी पदोन्नति हुई है, उसे वापस लिया जाए और उनकी जगह सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए। इसी आधार पर सामान्यवर्ग के कर्मचारियों ने अपने-अपने विभागों को पत्र लिखकर अपने जूनियर से ऊपर पदोन्नति देने का आग्रह किया है।








विभागों के पास पत्रों की बाढ़ आने से सरकार सकते में आयी और 1997 से कर्मचारियों को रिवर्ट करने से जो अव्यवस्था फैलेगी और समाज में गलत संदेश जाएगा, इसको भांपते हुए सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी है। हालांकि पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने विभिन्न हाईकोटरे के फैसले पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक संविधान पीठ बनाने निर्णय लिया है।

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