दिल्ली से कोल्हापुर जाने वाली एक स्पेशन ट्रेन मध्य प्रदेश पहुंच गई। घटना बुधवार की है। ट्रेन आगरा से गलत ट्रैक पर आई और 160 किलोमीटर रास्ता तय करके मुरैना जिले के बानमोर स्टेशन पहुंच गई। यहां पहुंचने पर ड्राइवर को अहसास हुआ कि वो गलत ट्रैक पर है। उसने अफसरों को जानकारी दी। करीब आधे घंटे बाद ट्रेन को बानमोर से झांसी भेजा गया। यहां से कोल्हापुर रवाना किया गया। रेलवे के मुताबिक- घटना की जांच कराई जाएगी।

ट्रेन का नाम स्वाभिमानी एक्सप्रेस है। इसमें ज्यादातर किसान थे जो एक रैली के लिए दिल्ली आए थे। ट्रेन बुधवार को दिल्ली से रवाना होकर दोपहर करीब 2:15 बजे मथुरा और फिर आगरा पहुंची। यहां से झांसी स्टाफ ट्रेन में लगाया गया। ट्रेन को आगे मथुरा-कोटा ट्रैक पर जाना था। लेकिन, गलती से इसे आगरा-मुरैना ट्रैक पर रवाना कर दिया गया। इसी ट्रैक पर चलते हुए ट्रेन मुरैना के करीब बानमोर स्टेशन पहुंच गई।








अफसरों की जानकारी में आने के बाद ट्रेन को झांसी भेजा गया। ट्रेन को मथुरा से कोटा-सूरत और पुणे होते हुए कोल्हापुर जाना था। बानमोर स्टेशन मास्टर भी यह देखकर हैरान था कि आखिर ये ट्रेन इस स्टेशन पर कैसे आ गई। क्योंकि, इसका कोई शेड्यूल ही नहीं था। बाद में, ट्रेन को भोपाल व इटारसी के रास्ते मूल गन्तव्य कोल्हापुर के लिए रवाना किया गया।




ट्रेन के गलत ट्रैक पर आने की जानकारी किसानों को मिली तो उन्होंने भी हंगामा किया। झांसी रेल मंडल के पीआरओ प्रदीप सुडेले ने बताया कि स्पेशल ट्रेन आगरा डिवीजन की गलती से बानमोर तक आ गई थी। इस रूट पर बुधवार को ऐसी किसी ट्रेन का आगमन शेड्यूल में था ही नहीं। झांसी से ट्रेन को बीना के रास्ते कोटा रवाना किया गया। मामले की जांच की जा रही है।

रेल मंत्रालय ने जारी किया स्पष्टीकरण 
रेल मंत्रालय ने घटना के बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है। रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल कुमार सक्सेना ने बयान जारी कर कहा कि ट्रेन को अनावश्यक नहीं चलाया गया। न कोई सिग्नल गलत मिला। उन्होंने ट्रेन में बैठे यात्रियों को हुई असुविधा के लिए समय में देरी को वजह माना।




वहीं उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद के सीपीआरओ गौरव बंसल का कहना है कि ट्रेन किसान रैली के लिए बुक हुई थी। कोल्हापुर से दिल्ली और फिर उसे दिल्ली से वापस कोल्हापुर जाना था। मथुरा होते हुए ट्रेन को वाया भरतपुर, कोटा की जगह उसे धौलपुर, ग्वालियर से बीना होते हुए भोपाल में हैंडओवर किया। जहां से मनमाड़ होते हुए कोल्हापुर महाराष्ट्र को चली गई। 160 कि.मी अधिक दूरी का रास्ता चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ट्रेनों का संचालन ऑपरेशनल ईश्यू है। हम ट्रेनों को खाली रास्ते से निकालना चाहते थे, इसलिए इस ट्रेन को आगरा से वाया झांसी होते हुए भेजा गया।

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