नई दिल्ली :- केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के मकान खरीदने के लिए लोन की शर्तों को आसान बना दिया है। ऐसा हाउजिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। अब ये कर्मचारी न सिर्फ हाउजिंग बिल्डिंग ऐडवांस के रूप में पहले से अधिक राशि लोन के रूप में ले सकेंगे बल्कि अब उन्हें पहले की अपेक्षा ब्याज भी कम देना पड़ेगा। इसके अलावा अगर कर्मचारी उसी मकान पर सरकार से ऐडवांस लेने के अलावा बैंक से भी अतिरिक्त लोन लेना चाहेंगे तो भी उन्हें एनओसी लेने के लिए लंबी चौड़ी कवायद की जरूरत नहीं करनी होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने हाउजिंग ऐडवांस के लिए नए नियमों का गुरुवार को ऐलान किया। इसका फायदा केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारी उठा सकेंगे।








मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अब कर्मचारी मकान के लिए अपने 34 महीने के बेसिक वेतन के बराबर और अधिकतम 25 लाख रुपये का हाउस बिल्डिंग ऐडवांस ले सकेंगे। अब तक यह सीमा महज 7.5 लाख रुपये ही थी। इसी तरह से अगर कर्मचारी मकान का विस्तार करना चाहता है तो अब इसके लिए 10 लाख रुपये तक का ऐडवांस ले सकेंगे। अब तक यह सीमा महज 1.80 लाख रुपये ही थी। इसी तरह से पहले जहां कर्मचारी के लिए बंदिश थी कि वह सिर्फ 30 लाख रुपये तक की लागत का ही मकान खरीद सकता है, वह अब बढ़कर एक करोड़ रुपये हो गई है।



अगर पति-पत्नी दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं तो इस स्थिति में दोनों मिलकर या अलग-अलग भी मकान ले सकेंगे जबकि पहले दोनों में से एक ही मकान ले सकता था। अगर किसी कर्मचारी ने फिलहाल बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से लोन लिया हुआ है तो वह भी सरकार से ही हाउस लोन ऐडवांस ले सकेगा। सरकार का कहना है कि पहले इस तरह के ऐडवांस हाउस लोन पर 9.5 फीसदी ब्याज लिया जाता था लेकिन अब यह 8.5 फीसदी लिया जाएगा। इसका असर यह होगा कि अगर किसी ने 25 लाख रुपये का लोन लिया है तो उसे 20 साल में ब्याज के तौर पर 15 लाख 84 हजार रुपये देने होंगे जबकि पहले ब्याज 17 लाख 71 हजार रुपये बनता था। यही नहीं हाउजिंग ऐडवांस लेने वाले कर्मचारी को 15 साल तो 13 हजार 890 रुपये की किस्त देनी होगी जबकि अंतिम पांच साल उसे 26 हजार 410 रुपये की किस्त अदा करनी होगी। चूंकि यह साधारण ब्याज है इसलिए दूसरे वित्तीय संस्थानों के मुकाबले यह सस्ता पड़ेगा।




नए नियमों में यह भी कहा गया है कि इस ब्याज दर की समीक्षा हर तीन साल में ही की जाएगी। हाउजिंग ऐडवांस की राशि की वसूली कर्मचारी के रिटायर होने में बचे वक्त के आधार पर ही होगी। अगर किसी कर्मचारी की नौकरी में सिर्फ 10 साल ही है तो उस स्थिति में उसी आधार पर ही उसके ऐडवांस चुकाने के लिए किस्त की राशि तय की जाएगी। इन नियमों में यह बंदिश जरूर लगाई गई है कि कर्मचारी जो भी मकान या फ्लैट खरीदेगा, उसका इरडा से मान्यता प्राप्त किसी प्राइवेट इंश्यारेंस एजेंसी से बीमा होना चाहिए।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि नियमों को सरल बनाने से हाउजिंग सेक्टर की डिमांड में खासी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसका फायदा 50 लाख सरकारी कर्मचारियों को होगा। मंत्रालय की ओर से इस बारे में गुरुवार को डिटेल सर्कुलर जारी किया गया।