रेलवे बोर्ड के नए अध्यक्ष ने रेल अधिकारियों को दौरे के समय सैलून के उपयोग से दूर रहने के निर्देश दिए हैं लेकिन रतलाम मंडल में असर दिखाई नहीं दे रहा है। बुधवार को सीआरएस सुशील चंद्रा तथा डीआरएम मनोज शर्मा का चित्तौड़गढ़ दौरा तय हुआ और सैलून की सुविधा का उपयोग किया गया। इतना ही नहीं यहां से एक अन्य सैलून खाली भी भेजा गया। ऐसे में रेलवे संगठन स्वयं इस सुविधा का दुरुपयोग मान रहे हैं। दूसरी ओर सरकारी बंगलों पर में रहने वाले अधिकारियों ने अभी भी ट्रैकमैन सहित अन्य चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को ड्यूटी से मुक्त नहीं किया है।

बता दें कि रेलवे बोर्ड अध्यक्ष द्वारा रेल मंत्रालय के निर्देशों का हवाला देते हुए घोषणा की थी कि रेलवे अधिकारी मंडलों में दौरे के लिए सैलून के बजाय वातानुकूलित कोच में सफर कर रकते हैं। उनके लिए कोच की श्रेणी तय की गई है। साथ ही उन्हें समय-समय पर ट्रेनों के जनरल कोचों में भी यात्रा कर यात्रियों की पीड़ा जानना है। बोर्ड चेयरमैन ने इस निर्देशों को पहले स्वयं पर अमल किया। इसके बाद अन्य मंडलों के लिए भी निर्देश जारी किए थे।








सुबह सैलून के साथ रवाना हुआ अमला

सीआरएस चंद्रा का रतलाम-चित्तौड़गढ़ के बीच दौरा कार्यक्रम निर्धारित हुआ। इसे देखते हुए यहां भी तैयारियां की गई। बुधवार सुबह ट्रेन संख्या 22901 बांद्रा-उदयपुर एक्सपे्रस से सीआरएस का सैलून मुंबई से लगा आया। इसमें डीआरएम शर्मा चित्तौड़गढ़ के लिए सवार हुए। सैलून के साथ निजी स्टाफ सहित अन्य इंतजाम भी किए गए। एक बार सैलून उपयोग में रेलवे को हजारों रुपए का खर्च उठाना पड़ा। इसके बाद अधिकारियों ने चित्तौड़ स्टेशन पर निरीक्षण किया। पूरे दौरे में कहीं भी रेल मंत्रालय के निर्देशों का असर नहीं दिखाई दिया। रेलवे सूत्र यहां तक बताते हैं कि दीपावली की छुट्टी पर जाने के लिए सीआरएस ने सैलून से यह दौरा निकाला।




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डीआरएम का सैलून खाली भेजा

फिजुलखर्ची का नजारा रेल मंडल के मुखिया को सालों से मिल रही सुविधा के दुरुपयोग में भी देखा गया। दरअसल निरीक्षण के लिए सीआरएस चंद्रा स्वयं के सैलून से रतलाम पहुंचे। यहां से उनके साथ डीआरएम को सवार होना था। रेल संगठन पदाधिकारी के मुताबिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार सीआरएस ने रतलाम से चित्तौड़ का निरीक्षण किया। इसके बाद सीआरएस वहां से उदयपुर के लिए निकल गए लेकिन डीआरएम शर्मा को रतलाम लौटना था। इसलिए मंगलवार रात को उनका सैलून रतलाम से ट्रेन संख्या 19712 इंटरसिटी एक्सपे्रस से जोड़कर चित्तौड़गढ़ भेजा गया। जिससे वे दूसरे दिन सैलून से रतलाम लौट सके। जबकि बोर्ड अध्यक्ष के निर्देशों का पालन होता तो वे ट्रेन के एसी कोच में सवार होकर भी रतलाम लौट सकते थे।




डीआरएम या अन्य आला अधिकारी रेल मंडल में निरीक्षण के दौरान अपने सैलून का उपयोग कर सकते हैं।

-जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम

18आरटीएम-29 : सैलून में सवार होकर डीआरएम और सीआरएस पहुंचे चित्तौड़।

बैडमिंटन हॉल में अभ्यास कर रहे बाहरी

खिलाड़ी, डीआरएम ने कराई जांच

-दूसरे दिन अभ्यास को लेकर गरमाया मामला

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

बैडमिंटन हॉल में बाहरी खिलाड़ियों के अभ्यास करने की सूचना के बाद डीआरएम ने मौके पर जांच कराई। इसे लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। खिलाड़ियों को हॉल में बाहरी खिलाड़ियों को प्रवेश देने को लेकर करीब आधा घंटा आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा। इसके बाद डीआरएम को स्थिति बताई गई।

दरअसल बैडमिंटन हॉल के उद्घाटन बाद से अब तक अभ्यास के लिए नहीं खोला गया था। पूर्व खिलाड़ी व सीटीआई स्लीपर रमेश खुंतवाल और अन्य खिलाड़ियों की मांग पर डीआरएम मनोज शर्मा ने मंगलवार को हॉल उपयोग की सशर्त मंजूरी दी। उन्होंने गाइडलाइन तय की है कि अस्थाई तौर पर हॉल का उपयोग रेलकर्मी व उनके आश्रित संतान ही कर सकती है। इसके बाद मंगलवार शाम को हॉल का ताला खुलवाया गया। पहले दिन चुनिंदा खिलाड़ियों ने अभ्यास किया, लेकिन बुधवार सुबह कुछ बाहरी खिलाड़ियों ने अभ्यास के लिए हॉल में प्रवेश किया। इसकी सूचना मिलने पर डीआरएम ने जांच के लिए डीसीएम अजय ठाकुर को मौके पर भेजा।

इधर, बाहरी खिलाड़ी को प्रवेश को लेकर हॉल में कहासुनी शुरू हो गई। दरअसल मामले में चांदवानी ने कहा कि सभी खिलाड़ियों से पूछताछ कराई। तब उन्होंने बताया कि उन्हें खुंतवाल ने खेलने के लिए बुलवाया है। मंगलवार रात भी कुछ बाहरी लोग हॉल में पहुंचे थे। डीआरएम ने स्पष्ट गाइडलाइन तय की है। इस दौरान मौके पर इंस्टीट्यूट के कोषाध्यक्ष अशोक तिवारी भी मौजूद रहे। खुंतवाल का कहना है कि वह आरडीएसए का कोच तथा कप्तान रहे हैं। उन्हें अभ्यास के लिए रोकटोक की जा रही है। बेडमिंटन का अभ्यास करने पहुंचे लोगों को मैंने नहीं बुलवाया।

रेल अधिकारी के घेराव के बाद मिला वेतन

-कर्मचारियों द्वारा काम बंद करने से ट्रेन सफाई बेहाल

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

रेलवे स्टेशन पर क्लीन ट्रेन स्टेशन सीटीएस के तहत काम करने वाले सफाई कर्मचारियों ने वेतन को लेकर बुधवार को डीआरएम ऑफिस में अधिकारी का घेराव किया। ट्रेड यूनियन नेता के दखल पर दोपहर बाद वेतन भुगतान किया गया। इस बीच करीब दो दिन से काम बंद रहने से ट्रेनों की सफाई ठप रही। कर्मचारियों ने दीपावली का बोनस नहीं मिलने तथा पीएफ नंबर की गड़बड़ी को लेकर भी अधिकारी से आपत्ति जताई। अधिकारी ने प्राथमिकता के तौर पर वेतन भुगतान की कार्रवाई की। सफाई कर्मचारी महेंद्र गारू व आकाश खरे ने बताया कि ठेकेदार ने पिछले माह भी वेतन लेट किया था तब नाराजगी जताने पर एएमई के समक्ष 10 तारीख तक वेतन देने की बात कहीं थी। इस बार तय तारीख को वेतन नहीं दिया गया। इसे लेकर मजबूरन उन्हें काम बंद करना पड़ा। सुबह तक वेतन नहीं मिला इसलिए सभी कर्मचारी डीआरएम से मिलने डीआरएम ऑफिस आए। डीआरएम, एडीआरएम तथा सीनियर डीएमई कमल चौधरी दौरे पर बाहर थे। बाद में एएमई एस अरुलमणि पालराज से चर्चा की। उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इस बीच वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ के नेता योगेश पाल सभी सफाई कर्मचारियों को लेकर सीनियर डीसीएम विपुल सिंघल के पास गए। सिंघल ने एएमई से मिलकर फोन पर वरिष्ठ अधिकारी से चर्चा करने को कहा। बाद में एएमई ने अपने अधिकारियों से चर्चा कर दोपहर तक वेतन खातों में आने का आश्वासन दिया। करीब 1 बजे सभी कर्मचारियों के खाते में वेतन आना शुरू हो गया। इसके बाद ट्रेनों में सफाई का काम शुरू हो सका।

18आरटीएम-30 : अधिकारी से चर्चा करते रेलवे कर्मचारी नेता योगेश पाल व सफाई कर्मचारी।

बिजली की आंखमिचौनी बिगाड़ रही त्योहार

रतलाम। त्योहारी दिनों में लोगों को बिजली की आंखमिचौनी से परेशान होना पड़ रहा है। बुधवार को भी फॉल्ट के बाद बिजली गुल हो गई। इसके बाद लोगों के कामकाज प्रभावित हुए। इससे पहले के दिनों में भी इसी तरह दिन में कई बार बिजली गुल होने की शिकायतें रही। कंपनी द्वारा दीपावली के पहले करीब 70 फीसदी मेंटेनेंस पूरा कर लिया। इसके बाद उम्मीद थी कि त्योहारी दिनों के अलावा भी लोगों को कटौती से राहत मिलेगी लेकिन अब स्थिति बिगड़ने लगी है। मंगलवार धनतेरस को भी कई क्षेत्रों में फॉल्ट के बाद बिजली चली चली गई थी। वहीं बुधवार को भी दोपहर बाद फॉल्ट से न्यू रोड, पावर हाउस रोड, दो बत्ती, डाट की पुलिया, सैलाना बस स्टैंड तथा दिलबहार चौराहा पर बिजली गुल हो गई। करीब 15 मिनट तक लोगों को परेशानी हुई।

व्यापारियों ने अंधेरा कर जताई नाराजी

-माणक चौक में अव्यवस्था से परेशान

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

दीपावली के मौके पर पहली बार माणक चौक के व्यापारियों ने बुधवार रात आधा घंटा दुकानों की लाइट बंद कर विरोध जताया। विरोध का कारण माणकचौक क्षेत्र में चारों तरफ से लोगों के आवागमन पर रोक लगाना और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना है। धनतेरस के दिन महालक्ष्मी मंदिर से कुबेर पोटली वितरण के दौरान अव्यवस्था से व्यापार प्रभावित होने से भी दुकानदार नाराज दिखे।

माणकचौक क्षेत्र में करीब 300 से अधिक व्यापारी हैं। ऐन वक्त पर प्रशासन द्वारा क्षेत्र में दो पहिया वाहन चालकों के आने-जाने पर रोक लगा दी। पार्किंग की व्यवस्था भी सही नहीं होने के कारण बाजार आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। धनतेरस के दिन ग्राहकी अच्छी न होने से नाराज व्यापारी महालक्ष्‌मी मंदिर से कुबेर पोटली के दौरान फैली अव्यवस्था को इसकी मुख्य वजह बता रहे हैं। इसी को लेकर माणकचौक, भुट्टा बाजार, मिर्ची गली व्यापारी संघ के आव्हान पर दुकानदारों ने अपनी दुकानों की लाइट रात 8 बजे से 8.30 बजे तक बंद रखी। सूचना मिलने पर माणकचौक पुलिस टीआई नरेंद्र यादव ने व्यापारियों को थाने बुलाकर समस्या पूछी और निराकरण का आश्वासन दिया।

पार्किंग की व्यवस्था नहीं

माणकचौक, भुट्टा बाजार, मिर्ची गली व्यापारी संघ अध्यक्ष मंगलेश बोहरा ने बताया कि क्षेत्र में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। कुबेर पोटली वितरण के दौरान लंबी लाइन लगे होने से आमजन दुकान तक नहीं पहुंच पाया। हम किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचा रहे हैं। मंदिर शासकीय संपत्ति है तो शासन भी बाजार क्षेत्र के व्यापारियों की परेशानियों को समझे। किराना व्यापारी मधुसूदन का कहना था कि धनतेरस को रात 11 बजे भी पुलिस द्वारा सामग्री लेकर आए वाहन को अंदर नहीं आने दिया। मंदिर व प्रशासन के जिम्मेदारों को इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए।

18आरटीएम-43 : माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर के सामने दोनों तरफ स्थित दुकानों पर लाइट बंद।

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