बड़ा फैसला : रेलवे के 14 प्रिंटिंग प्रेस होंगे बंद, इनमें कार्यरत कर्मचारियों को अन्य इकाइयों में नियुक्त किया जाएगा
नई दिल्ली (एसएनबी)। डिजिटल इंडिया के दौर में अनुपयोगी साबित हो रहे रेलवे के 14 प्रिंटिंग प्रेस बंद होंगे और यहां कार्यरत कर्मचारियों को अन्य इकाइयों में नियुक्त किया जाएगा। इसी तरह, रेलवे में मशीनीकरण और डिजिटलीकरण के कारण कम हुए काम की भी समीक्षा की जा रही है।हाल ही में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे बोर्ड के आला अधिकारियों और सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों के साथ बैठक की थी। बैठक में रेलवे के प्रिंटिंग प्रेसों की समीक्षा की गई थी। इसमें पाया गया था कि अब ये प्रिंटिंग प्रेस उपयोगी नहीं रह गए हैं।








पहले इन प्रिंटिंग प्रेसों में रेलवे के टिकट और अन्य स्टेशनरी की छपाई बड़े स्तर पर होती थी, लेकिन बदलते दौर में इनकी उपयोगिता कम हो गई है, क्योंकि रेलवे में ई-टिकट का प्रचलन बढ़ा है और साथ ही कम्प्यूटरीकरण से प्रिंटिंग सामग्री की मांग कम हुई है। इसके अलावा यह समीक्षा की गई कि जितना खर्च इन प्रिंटिंग प्रेसों को चलाने और वेतन में आता है, उसमें कम में स्टेशनरी की मांग बाजार से पूरी की जा सकती है। इन तमाम कारणों को देखते हुए रेलवे के 14 प्रिंटिंग प्रेसों को बंद करने का फैसला किया गया है। ये प्रिंटिंग प्रेस रेलवे के विभिन्न जोनों में हैं। इसी तरह, अन्य विभागों में मशीनीकरण और डिजिटलीकरण के बाद कार्यो को लेकर समीक्षा की जा रही है ताकि वहां भी जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों को समायोजित किया जा सके।




     रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए नई प्रौद्योगिकी लानी होगी : पीयूष

रेल मंत्री ने माना कि यात्री गाड़ियों एवं मालगाड़ियों के परिवहन के लिए अलग अलग लाइनें होनी चाहिए

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए नई प्रौद्योगिकी लाने पर बल देते हुए उद्योग जगत एवं निवेशकों का श्रेष्ठतम तकनीक के साथ आगे आने का आह्वान किया तथा घोषणा की कि रेलवे को आपूत्तर्ि करने वाले निजी उद्यमियों को 30 दिन के भीतर इलेक्ट्रॉनिक पद्धति से पूरा भुगतान कर दिया जाएगा।गोयल ने यहां प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय रेल प्रदर्शनी एवं सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर देश विदेश के निवेशकों एवं रेल उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जापान के राजदूत केंजी हिरामात्सु शामिल हुए।

रेल मंत्री ने भारत जापान के सहयोग से मुंबई-अहमदाबाद के बीच शिन्कान्सेन हाईस्पीड रेल के क्षेत्र में हुए समझौते की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे में 1969 में राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के बाद उससे अधिक गति की रेल सेवा शुरू नहीं हो पाई। पचास साल बाद देश में हाईस्पीड ट्रेन सेवा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि रेलवे में यात्री गाड़ियों एवं मालगाड़ियों के परिवहन के लिए अलग अलग लाइनें होनी चाहिए। रेल सेवा को आरामदायक, सुविधाजनक तथा लागत घटाकर किफायती एवं लाभकारी बनाया जाना चाहिए। इसी प्रकार से मालवहन को भी सभी पक्षकारों के लिए संतोषजनक बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे उच्च एवं विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी के लिए आतुर है और इसमें अधिक विलंब नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रायबरेली स्थित कोच फैक्टरी की क्षमता एक हजार कोच प्रतिवर्ष से बढ़ाकर पांच हजार कोच प्रतिवर्ष करने का निर्णय लिया गया है।




इस पर करीब एक हजार करोड़ रपए की लागत आएगी। गोयल ने रेलवे के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा देशी विदेशी नयी प्रौद्योगिकी की समीक्षा एवं परीक्षण करने के नाम पर उसे बरसों तक लटकाने की आदत पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आरडीएसओ को कहा गया है कि वह परीक्षण के लिए लंबित सभी प्रौद्योगिकी का एक निश्चित समयावधि में परीक्षण करके मंजूर या नामंजूर करे और उसके कारणों को बताते हुए सार्वजनिक मंच पर प्रकाशित करे। उन्होंने कहा कि रेलवे के वित्त अधिकारियों को परियोजनाओं की लागत के आकलन की प्रक्रिया में सुधार लाने को भी कहा गया है। उन्होंने निवेशकों एवं देशी विदेशी उद्योगपतियों से रेलवे की नई प्रौद्योगिकी एवं अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों की आपूत्तर्ि के लिए आगे आने का आह्वान करते हुए रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी आपूत्तर्िकर्ताओं को 30 दिन के भीतर भुगतान करें और आपूत्तर्िकर्ताओं को रेलवे कार्यालयों के चक्कर लगवाने की बजाए आरटीजीएस के जरिये उनके खाते में भेजा जाये।

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