अपने घर से या गृह जिले से दूर पदस्थ रेलकर्मियों के लिए एक राहत देने वाली खबर है। क्योंकि रेलवे बोर्ड ने स्वयं की प्रार्थना (ऑन रिक्वेस्ट) पर ट्रांसफर चाहने वालों की राह को आसान बनाया है।

इसके लिए रेलवे बोर्ड ने उपरे सहित देशभर के सभी 17 जोनल रेलवेज को हाल ही में एक आदेश जारी किया है। एआईएससीएण्डएसटी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ बीएल बैरवा ने बताया कि आदेश में बोर्ड ने सभी जोनल रेलवेज से कहा है कि म्यूचुअल ट्रांसफर (इंटर जोन/डिवीजन) के मामलों में कर्मचारी को दोनों जगह से क्लीयरेंस मिलने के बाद 15 दिन में रिलीव किया जाए। साथ ही ऐसे लंबित मामलों का 30 सितंबर तक निस्तारण कर रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जाए। गौरतलब है कि पहले भी बोर्ड ने यह जानकारी मांगी थी कि जिन कर्मचारियों के इंटर डिवीजन और इंटर रेलवे ट्रांसफर के आदेश जारी हो गए हैं। उन्हें अभी तक कार्यमुक्त किया गया है या नहीं। अगर कार्यमुक्त नहीं किया गया है तो ऐसे सभी कर्मचारियों का विवरण बोर्ड को उपलब्ध कराया जाए।







दरअसल रेलवे बोर्ड ने तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु के निर्देश पर यह आदेश जारी किए थे। एनजेसीए के सेक्रेट्री एसजी मिश्रा एआईआरएफ के एजीएस मुकेश माथुर ने सीआरबी अश्विनी लोहानी से अपनी पिछली मुलाकात में उनके समक्ष इस मुद्दे को प्रबलता से उठाया था। जिसको समझते हुए गंभीरता से लेते हुए सीआरबी ने सभी जोन से इस संबंध में जानकारी मांगने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद यह उम्मीद लगाई जा रही है कि जल्द ही जोनल रेलवेज ऐसे सभी कर्मचारियों को कार्यमुक्त करेंगे।



विश्व बैंक ने भारतीय रेलवे से कहा- ऐसा करेंगे तो नहीं होंगे हादसे

देश में आए दिन रेल हादसे देखने को मिल रहे हैं. इसको लेकर सरकार अभी तक कोई पुख्ता कदम नहीं उठा पाई है. हादसों से बचने के लिए विश्व बैंक ने भारतीय रेलवे को सुझाव दिया है.

विश्व बैंक ने भारतीय रेलवे से कहा है कि अधिक रोशनी वाली लाइटें और गाढ़े पीले रंग के ट्रेनों के डिब्बे होने से दुर्घटना से बचा जा सकता है. विश्व बैंक ने रेलवे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक रिपोर्ट में कहा है कि कर्मचारियों को ऐसे रंग के कपड़े पहनने चाहिये जो दूर से दिखें. इसके अलावा हर ट्रेन में आग पर काबू पाने वाला उपकरण लगाया जाना चाहिए.




‘स्ट्रेंथेनिंग सेफ्टी ऑन इंडियन रेलवे’ नामक रिपोर्ट इस सप्ताह की शुरुआत में रेलवे को सौंपी गयी. ‘पीटीआई भाषा’ ने रिपोर्ट का आंकलन किया है. इसमें सुझाव दिया गया है कि एक त्वरित लक्ष्य के तहत रेलवे को सुरक्षा उपकरण के रूप में ट्रेन के सामने ‘अधिक रोशनी देने वाली लाइट’ लगाना चाहिए, जिससे उसकी विजिबिलिटी बढ़ सके.

ट्रेनों को पीले रंग में रंगा जाना चाहिए, ताकि यह विशेषकर शाम के समय जब दृश्यता का स्तर कम हो जाता है दूर से ही नजर आ जाए. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सभी ट्रेनों में आग रोकथाम का उपाय और आग पर काबू पाने वाला उपकरण लगाये जाने चाहिए. कर्मचारियों को अधिक दृश्यता वाले कपड़े उपलब्ध कराए जाने चाहिए जो हर मौसम के लिए उपयुक्त हो. यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों का जूता और उनके हेलमेट उनके कामकाज के लिहाज से उपयुक्त हो.’’ अप्रैल में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सुरक्षा के मुद्दे पर एक अध्ययन के लिए विश्व बैंक से संपर्क किया था.