अब पितृत्व अवकाश का प्रस्ताव, विधेयक पर अगले सत्र में विचार संभव

बच्चे के जन्म के बाद उसकी परवरिश में पिता की बराबर की भूमिका सुनिश्चित करने के लिए एक गैर सरकारी विधेयक में सभी क्षेत्रों में काम करने वाले कामगारों के लिए तीन महीने तक के पितृत्व अवकाश का प्रस्ताव किया गया है।पितृत्व लाभ विधेयक-2017 पर संसद के अगले सत्र में विचार किया जा सकता है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि संतान के जन्म की स्थिति में माता और पिता दोनों को समान फायदा मुहैया कराया जाए। कांग्रेस सांसद राजीव सातव इस विधयेक के प्रस्तावक हैं।








उनका कहना है कि बच्चे की परवरिश माता-पिता दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है और बच्चे की उचित देखभाल सुनिश्चित करने लिए दोनों को समय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक से निजी और गैर संगठित क्षेत्र में काम करने वाले 32 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा होगा। अभी, अखिल भारतीय और केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलता है। कई कारपारेट समूह भी अपने कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश की सुविधा देते हैं। अगर इस विधेयक को कानून की शक्ल मिल जाए तो इससे न सिर्फ पितृत्व अवकाश की मियाद बढ़ जाएगी, बल्कि सभी कामगार इस सुविधा के दायरे में आ जाएंगे। विधेयक में प्रस्ताव दिया गया है कि पितृत्व अवकाश की मियाद बच्चे के जन्म से तीन महीने के लिए होगी।




न्यूनतम बैलेंस में छात्रों व बुजुगरे को छूट संभव

स्टेट बैंक आफ इंडिया ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की तीखी प्रक्रि या मिलने के बाद मासिक औसत बैलेंस बरकरार न रखने पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा कर रहा है। संभावना है कि शुल्कों में छात्रों व वरिष्ठ नागरिकों को रियायत मिल जाए। बैंक ने मई में शुल्कों के नाम पर235 करोड़ रपए वसूले हैं।बैंक के एमडी (राष्ट्रीय बैंकिंग समूह) रजनीश कुमार ने कहा, हमें इस संबंध में उपभोक्ताओं की प्रतिक्रि याएं मिली हैं और हम उनकी समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम आंतरिक विमर्श कर रहे हैं कि क्या वरिष्ठ नागरिकों या विद्यार्थियों जैसे उपभोक्ताओं की कुछ निश्चित श्रेणी के लिए शुल्क में सुधार किया जानी चाहिए या नहीं।




एसबीआई ने 5 साल के अंतराल के बाद इस साल अप्रैल में मासिक औसत बैलेंस बरकरार नहीं रखने पर शुल्क को फिर से लागू किया था। इसके तहत खाते में मासिक औसत नहीं रख पाने पर 100 रपए तक के शुल्क और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का प्रावधान किया गया था। शहरी इलाकों में मासिक औसत बैलेंस पांच हजार रपए तय किया गया था। इसके 50% कम हो जाने पर 50 रपए प्लस जीएसटी तथा 75 प्रतिशत कम हो जाने पर 100 रपए प्लस जीएसटी का प्रावधान था।

द मिनिमम बैलेंस न रखने पर 100 रपए तक वसूल रहा है बैंकद बैलेंस बरकरार न रखने पर पेनाल्टी और जीएसटी की वसूलीद मई में मिनिमम बैलेंस के नाम पर बैंक ने वसूले Rs235 करोड़द स्टेट बैंक के इस नियम पर ग्राहकों ने जताई है कड़ी नाराजगी

paternity leave 3 months st