गोयल ने एक सप्ताह में ही कर दिया रेलवे बोर्ड का प्रशासनिक कायाकल्प, रेल मंत्री ने रेलवे बोर्ड और सदस्यों का बांटा काम, अधिकारियों के पदनाम भी बदले

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेल मंत्रालय की कमान संभालते ही रेलवे का कायाकल्प करने में जुट गए हैं। रेलवे के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दिनों तक मैराथन बैठक के बाद रेलवे बोर्ड का प्रशासनिक कायाकल्प कर दिया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों के काम का बंटवारा करते हुए सीधे तौर पर सदस्यों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। यहां तक रेलवे बोर्ड और जोनल रेलवे के अधिकारियों का पदनाम को बदल दिया गया है। यह बदलाव शीर्ष स्तर पर रेलवे बोर्ड अध्यक्ष जिम्मेदार बनाते हुए सदस्यों भी जिम्मेदार बनाया है।रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी, बोर्ड के वित्त आयुक्त बीएन महापात्रा, सदस्य रोलिंग स्टॉक/सदस्य स्टॉफ रविंद्र गुप्ता, सदस्य ट्रैक्शन/सदस्य इंजीनियरिंग घनश्याम सिंह और सदस्य यातायात मोहम्मद जमशेद के बीच कामों का बंटवारा कर प्रशासनिक कायाकल्प किया है।








अभी तक सीथे तौर पर सभी विभागों के प्रमुख रेलवे बोर्ड अध्यक्ष होते थे। अब कई विभागों को विभिन्न सदस्यों को सीधे जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसा समझा जाता है कि अब सदस्यों के शीर्ष स्तर पर अध्यक्ष रेलवे बोर्ड उन विभागों जिम्मेदारी को देखेंगे। अब रेलवे बोर्ड स्तर पर सदस्य ट्रैक्शन सभी उत्पादन इकाइयों कार्य देखेंगे, जबकि सभी कोच उत्पादन इकाइयों को सदस्य रोलिंग स्टॉक देखेंगे। बड़ोदरा में अधिकारियों के ट्रेनिंग स्कूल के प्रमुख की जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड स्तर पर सदस्य स्टॉफ देखेंगे।




वह ही स्वास्य एवं कार्मिक के महानिदेशकों के प्रमुख होगे। अभी तक सदस्य स्टॉफ के तहत ही रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक आते थे, लेकिन अब उनकी रिपोर्टिग सदस्य यातायात मोहम्मद जमशेद के पास होगी। सदस्य यातायात के बाद सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉरमेंशन सिस्टम के प्रमुख भी जिम्मेदारी होगी। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के पास आरडीएसओ, कोंकण रेलवे, महानिदेशक सिंग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन और महानिदेशक स्टोर के प्रमुख की जिम्मेदारी होगी।इतना नहीं, रेलवे बोर्ड में अभी तक सलाहकार पद होता था अब उसका नाम बदलकर प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (पीईडी) कर दिया गया है।




इसी तरह से जोनल रेलवे में विभिन्न विभागों जैसे इंजीनियरिंग, फाइनेंस, स्टोर के प्रमुखों के पदनाम को भी बदल दिया गया है। जिस तरह से जोनल रेलवे में प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर होते हैं, उसी तरह से फाइनेंस और स्टोर के पदनाम के आगे प्रिंसिपल जुड़ जाएगा। गोयल ने रेलवे में प्रशासनिक सुधार करते हुए रेलवे बोर्ड स्तर पर संतुलन और अधिकारियों को अत्यधिक जिम्मेदारी के साथ जवाबदेगी तय करने की कोशिश की है। समझा जाता है कि काम के बंटवारे के बाद रेलवे में सुधार की नई प्रगति दिखाई देगी।

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