8.65 फीसदी ब्याज मिल रहा ईपीएफ खाते पर, 11 फीसदी औसत रिटर्न एनपीएस में पिछले पांच साल में 

ननेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) सेवानिवृत्ति के लिहाज से सबसे बेहतर निवेश विकल्प हैं। लेकिन अगर इन दोनों के पिछले प्रदर्शन को देखा जाए तो एनपीएस रिटर्न के मामले में ईपीएफ से ज्यादा आकर्षक है और इसके जरिये लंबी अवधि में करीब डेढ़ गुना अधिक पूंजी जमा करसकते हैं। लेकिन जरूरत पर राशि निकालने की सुविधा में ईपीएफ आगे है। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की नजर में कब कौन है ज्यादा बेहतर।








पिछले पांच साल में ईपीएफ के मुकाबले दो फीसदी से भी ज्यादा रिटर्न ’ राशि को शेयर और अन्य माध्यमों में निवेश करने का विकल्प निवेशक के पास ’ परिपक्वता पर मिलने वाली 40 फीसदी राशि कर मुक्त होती है ’ निवेशक परिपक्वता पर 100 फीसदी राशि भी एन्यूटी में डाल सकते हैं जिससे पेंशन ज्यादा होगी ’ सालाना दो लाख तक निवेश पर कर छूट मिलती है ’ मूल वेतन का 10 फीसदी इसमें जमा करने का विकल्प

फायदे का गणित

आपकी उम्र 30 साल है और 2,000 रुपये ईपीएफ में औसतन हर माह निवेश कर रहे हैं तो 8.65 फीसदी के अनुमानित ब्याज पर 30 साल में 31,84,864 रुपये जमा होंगे। जबकि एनपीएस में इतनी ही राशि अनुमानित 11 फीसदी के रिटर्न पर समान अवधि में 50,12,779 रुपये हो जाएगी।




’ तीन स्तरों पर कर छूट मिलती है ’ सालाना 1.50 लाख रुपये तक निवेश पर कर छूट ले सकते हैं ’ मूल वेतन का 12 फीसदी जमा करने का विकल्प ’ जरूरत पर कुछ शर्तो के साथ कभी भी राशि निकालने की सुविधा ’ अधिकतम 15 फीसदी राशि शेयरों में निवेश की जा सकती है जिसका फैसला ईपीएफओ करता है




क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के फेलो मुकुल जी.अशर कहते हैं कि एनपीएस में निवेश को सेवानिवृत्ति के तीन साल तक आप एन्यूटी पर फैसला रोक कर रख सकते हैं। इससे पूंजी बढ़ती है एन्यूटी लेने के बाद ज्यादा पेंशन मिलती है। जबकि ईपीएफ में ऐसा नहीं है। इटिका वेल्थमैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी गजेन्द्र कोठारी का कहना है कि एनपीएस ऑटो निवेश का विकल्प उम्र के हिसाब से राशि को शेयरों में लगाने की सुविधा देता है। जबकि ईपीएफ यह सुविधा नहीं है।

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