अब एसएम-कंट्रोलर का ऑडियो वायरल, नौचंदी एक्सप्रेस हादसे से बाल-बाल बची , अलाइनमेंट हुआ नहीं, दौड़ा दी ट्रेनें

मुजफ्फरनगर/मेरठ का.सं.खतौली में रेल हादसे को रेलवे सेफ्टी कमिश्नर शैलेश कुमार पाठक ने मानवीय चूक माना है। जांच करने खतौली पहुंचे सेफ्टी कमिश्नर ने कहा कि ट्रैक पर काम करने के लिए पीडब्लूआई ने कंट्रोल से ब्लॉक मांगा था मगर नहीं मिला। कंट्रोल ने ट्रैक पर ट्रेनों का दबाव अत्याधिक होने की बात कहते हुए संचालन जारी रखा। ब्लॉक नहीं मिलने के बावजूद भी रेल कर्मचारियों ने ट्रैक पर मरम्मत के नियमों का पालन नहीं किया।








इसकी वजह से यह हादसा हो गया।रेलवे सेफ्टी कमिश्नर स्पेशल ट्रेन से सोमवार दोपहर खतौली पहुंचे। दिल्ली, अंबाला, मुरादाबाद डिवीजन अफसरों के साथ कमिश्नर ने मौके पर बारीकी से छानबीन की। पीड़ितों से बातचीत भी की। बाद में खतौली स्टेशन पर मीडिया से बातचीत में कहा कि शैलेश पाठक ने कहा, यदि कंट्रोल से ब्लॉक दिया गया होता तो शायद ये हादसा नहीं होता। पीडब्लूआई के बाद खुद स्टेशन मास्टर ने भी कंट्रोल को फोन करके बार-बार ब्लॉक देने का अनुरोध किया था। कंट्रोल ने एसएम से कहा कि ट्रैक पर पीछे से ट्रेनों का ज्यादा दबाव है, इसलिए इन ट्रेनों को पास करना ही पड़ेगा।

खतौली में सोमवार को ट्रैक के अलाइनमेंट कार्य को पूरा करने में जुटे कर्मचारी। ’ हिन्दुस्तान




रेलवे कर्मचारियों के बाद खतौली के स्टेशन मास्टर और कंट्रोलर के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ है। इसमें एसएम, कंट्रोलर से बार-बार ब्लॉक देने का अनुरोध कर रहा है। ऑडियो में कंट्रोल की ओर से कहा जा रहा है कि पीछे से ट्रेनों का ग्रुप है, अब कैसे मरम्मत कार्य हो जाएगा। यदि 20 मिनट का ब्लॉक दे दिया तो मेन लाइन और लूप लाइन सब बंद हो जाएंगी। रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने भी ऐसी ऑडियो उनके मोबाइल पर आने की पुष्टि की है। कमिश्नर ने कहा, ऑडियो की जांच कराई जा रही है।




सोमवार शाम को मुजफ्फरनगर से मेरठ की ओर जा रही नौचंदी एक्सप्रेस पलटने से बाल-बाल बच गई। लाइन के निकले पड़े क्लिप को देखकर लोगों ने शोर मचा दिया। शोर मचते ही मरम्मत कर रहे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। झंडी दिखाकर ट्रेन को रुकवा दिया। स्टेशन मास्टर से वार्ता के बाद पटरी की मरम्मत होने पर ट्रेन को धीमी गति से निकाला गया।

रविवार देर रात एक बजे क्षतिग्रस्त ट्रैक नया बनकर तैयार हो गया। ट्रैक का अलाइनमेंट किए बिना ही उस पर ट्रेनें दौड़ा दी गईं। रात से लेकर सुबह आठ बजे तक करीब 15 से ज्यादा एक्सप्रेस, ट्रेनें और मालगाड़ियां इस ट्रैक पर दौड़ती रहीं। सुबह रेल कर्मचारियों ने पटरियों का अलाइनमेंट सही करना शुरू किया तो पटरियों में दस एमएम तक का हेरफेर मिला। तमाम पेंड्रोल क्लिप ढीले पड़े मिले।

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