हादसों के लिए रेलवे का सिस्टम और कर्मचारी जिम्मेदार!

रेलवे सूत्रों की मानें तो रेलवे में दुर्घटनाओं की एक वजह यह है कि सेफ्टी पर फोकस ही नहीं है। रेलवे में सेफ्टी से जुड़े एक लाख 24 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, उन पर रेलवे में किसी का फोकस नहीं है। रेलवे से जुड़े कई अधिकारियों का कहना है कि बीते कुछ वक्त से रेलवे का फोकस रेल एक्सीडेंट से पल्ला झाड़ने का रहा है और हर बार पटरियों से छेड़छाड़ या आतंकी साजिश कहकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश होती रही है। जिसकी वजह से रेल एक्सीडेंट के असली कारणों का न तो पता चल पाता है और न ही उन कमियों को दूर करने का प्रयास होता है। रिटायर्ड अफसरों का कहना है कि रेलवे का सिस्टम पूरी तरह से फुलप्रूफ है। एक्सीडेंट तभी होता है, जब नियमों की अनदेखी की जाती है।








उत्कल कलिंगा एक्सप्रेस हादसे ने रेलवे के उन दावों की पोल खोल दी है, जो हर हादसे के बाद रेलवे करता रहा है। रेलवे के खुद के आंकड़े बता रहे हैं कि हाल ही में जितने भी हादसे हुए हैं उनमें से अधिकांश के लिए रेलवे के कर्मचारी या रेलवे सिस्टम ही जिम्मेदार है। इसके बावजूद रेलवे ऐसे जानलेवा हादसे रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। इसकी वजह यह भी है कि भयंकर रेल हादसों के कारणों की जांच करके कमियों को दूर करने की बजाय रेल हादसों को ही रेलवे भुला देता है।





रेलकर्मियों की गलती : इंडियन रेलवे के आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि इस साल 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय साल में रेलवे के 104 बड़ी दुर्घटनाओं में से 66 के लिए उसके कर्मचारियों की ही गलती थी। इसी तरह से इस साल एक अप्रैल से 30 जून तक हुए 11 हादसों में से 8 में रेलकर्मियों की गलती थी। महत्वपूर्ण है कि रेल एक्सीडेंट का यह सिलसिला बीते साल से और तेजी से बढ़ा है। पिछले साल नवंबर में कानपुर के पास रेल दुर्घटना में 150 यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और लगभग इतने ही घायल हो गए थे।




जांच का पता नहीं : इस रेल हादसे के बाद जमकर हंगामा हुआ लेकिन हालत यह है कि नौ महीने बीतने के बावजूद अब तक इस रेल हादसे की जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कानपुर हादसे की जांच भी कमिश्नर रेलवे सेफ्टी को सौंपी गई थी। कायदे से इस तरह के मामलों में फौरन जांच पूरी करके ऐसे कदम उठाने की जरूरत होती है ताकि भविष्य में और हादसे न हों लेकिन रेलवे के आला अफसरों को भी अब तक इस जांच रिपोर्ट का पता नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी इसलिए शायद सीआरएस की जांच रिपोर्ट नहीं आयी। रेलवे का तर्क है कि सीआरएस सिविल एविएशन मिनिस्टरी के अंतर्गत आता है। रेलवे का कोई नियंत्रण नहीं है।

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