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रेलवे बोर्ड के उप निदेशक को समय से पहले किया ‘‘विदा’, उत्पादकता के मानक पर खरा नहीं उतरने से गिरी गाज, जबरन सेवानिवृत्ति पर रेलवे बोर्ड में हड़कंप पीएम के फरमान का असर








प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अक्षम अधिकारियों को समय से पूर्व विदाई का फरमान रेलवे में चलने लगा है। अब रेलवे में अधिकारियों की कार्य की समीक्षा होने लगी है। इस समीक्षा में मानक पर खरे नहीं उतरने वाले अधिकारियों की नौकरी से विदाई का क्रम शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत रेलवे बोर्ड से हो गयी है।

रेल मंत्रालय ने कार्य समीक्षा के दौरान उत्पादकता के मानक पर खरा नहीं उतरने और कार्य में लापरवाही बरतने पर एक उप निदेशक को सेवानिवृत्ति से पहले नौकरी से विदाई दे दी है। इस कार्यवाही से रेलवे बोर्ड में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड में तैनात जिस उप निदेशक को समय से पूर्व सेवानिवृत्त किया गया है, उसकी आयु जनवरी 2015 में 50 वर्ष की पूरी हो चुकी थी। रेलवे बोर्ड ने उक्त उप निदेशक की कार्य की समीक्षा कुछ महीने से शुरू कर दी थी।




उप निदेशक की आयु, उत्पादकता और कार्य के प्रति लापरवाही को देखते हुए और केंद्रीय सेवा नियमावली के प्रावधान 1802 (ए) के आईआरसीए वाल्यूम-2 के एफआर-56 (जे) का हवाला देते हुए उसे सेवानिवृत्त कर दिया गया। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने पे एंड एकाउंट आफिसर को निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त के समय होने वाला हिसाब-किताब कर दें।पीएम ने अपने एक बयान में कहा था कि उत्पादकता नहीं देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की नहीं चलेगी।




समय से पूर्व उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के इस फरमान के बाद सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्य समीक्षा का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय सेवा नियमावली में यह पहले से ही हवाला दिया गया है कि केंद्रीय कर्मचारियों की उत्पादकता का आकलन सेवाकाल में 50 वर्ष अथवा 55 वर्ष की आयु के बाद किया जा सकता है। इस कार्य समीक्षा में फिट नहीं पाए जाने पर उन्हें जबरन सेवानिवृत्त करने का प्रावधान है।

Source:- Rashtriye Sahara